राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने हीमोफीलिया जैसी दुर्लभ बीमारी और इससे जुड़े उपचारों के बारे में अधिक से अधिक लोगों को जागरूक किए जाने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में हीमोफीलिया से पीड़ित तीन-चौथाई से अधिक लोगों की समय पर पहचान नहीं हो पाती है। इसके कारण बीमारी की शुरुआत के बाद समय पर उपचार प्रारंभ नहीं हो पाता और रोग बढ़ता जाता है।
उन्होंने कहा कि अत्यधिक रक्तस्राव से जुड़ी यह बीमारी केवल स्वास्थ्य क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका संबंध समाज, परिवार, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक न्याय से भी है।
श्री बागडे शनिवार को हीमोफीलिया फेडरेशन, इंडिया द्वारा आयोजित हीमोफीलिया जागरूकता राष्ट्रीय अभियान को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि चिकित्सा सेवा से जुड़े सभी चिकित्साकर्मियों से उनकी अपेक्षा है कि वे ‘मनी-माइंडेड’ नहीं, बल्कि ‘सर्विस-माइंडेड’ होकर कार्य करें।
आयुष्मान भारत से जरूरतमंदों को स्वास्थ्य सुरक्षा
राज्यपाल ने केंद्र सरकार की आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना को विश्व की सबसे बड़ी चिकित्सा राहत योजनाओं में से एक बताते हुए कहा कि इसके तहत पात्र परिवारों को प्रतिवर्ष 5 लाख रुपये तक का निःशुल्क एवं कैशलेस उपचार उपलब्ध कराया जाता है।
उन्होंने कहा कि आठ वर्ष पूर्व आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना की शुरुआत इस उद्देश्य के साथ की गई थी कि प्रत्येक भारतीय को उच्च गुणवत्ता वाली और किफायती स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो सकें। उन्होंने कहा कि आज देश में 6 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को प्रतिवर्ष 5 लाख रुपये तक के स्वास्थ्य बीमा का लाभ मिल रहा है।
राज्यपाल ने कहा कि हीमोफीलिया से पीड़ित रोगियों के साथ-साथ सभी प्रकार की दुर्लभ बीमारियों के समय पर निदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ सुदूर क्षेत्रों तक पहुंचाने तथा जरूरतमंद लोगों को समय पर उपचार एवं स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया।
