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चंबल अभयारण्य में अवैध खनन पर सख्ती, 40 संवेदनशील स्थलों पर हाईटेक निगरानी

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9 सितम्बर

उच्चतम न्यायालय के आदेशों तथा केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) की सिफारिशों की अनुपालना में राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य क्षेत्र में अवैध बालू-बजरी खनन की रोकथाम एवं वन्यजीव संरक्षण की दिशा में राज्य सरकार ठोस एवं निर्णायक कदम उठा रही है। इसी क्रम में बुधवार को शासन सचिवालय में मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक आयोजित हुई। बैठक में विभिन्न विभागों द्वारा अब तक की गई अनुपालना तथा आगामी अदालती सुनवाई की तैयारियों की बिंदुवार समीक्षा की गई।

मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य सरकार उच्चतम न्यायालय के निर्देशों की पालना के प्रति पूर्णतः संवेदनशील एवं गंभीर है। राज्य सरकार द्वारा 9 अगस्त को विस्तृत शपथ-पत्र प्रस्तुत किया जा चुका है तथा अधिकांश महत्वपूर्ण बिंदुओं पर प्रभावी अमल सुनिश्चित कर लिया गया है।

बैठक में बताया गया कि अभयारण्य क्षेत्र में तैनात वन अधिकारियों एवं कर्मचारियों को कार्यस्थल पर वैधानिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), 2023 के तहत आवश्यक अधिसूचना 13 अगस्त को जारी की जा चुकी है। मध्य प्रदेश के मुरैना मॉडल की तर्ज पर जिला स्तर पर अंतर-विभागीय समन्वय के लिए ‘ज्वाइंट एसओपी’ भी लागू कर दी गई है।

इस वैधानिक ढांचे को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने के लिए भौतिक निगरानी तंत्र को भी सुदृढ़ किया जा रहा है। खनन माफिया एवं अवैध परिवहन पर 24×7 नजर रखने के लिए हाई-मास्ट टावर, ऑप्टिकल फाइबर तथा एआई एवं थर्मल नाइट-विजन सक्षम कैमरों की स्थापना का कार्य तेजी से जारी है। वहीं, शुष्क मौसम एवं मानसून के बाद नदी के स्वरूप तथा नए मार्गों की पहचान के लिए जिला कलेक्टरों द्वारा नियमित ड्रोन सर्वे भी सुनिश्चित किया जा रहा है।

40 संवेदनशील स्थलों पर सशस्त्र होमगार्ड जवानों की तैनाती

तकनीकी निगरानी के साथ-साथ मौके पर मानवीय सुरक्षा घेरा भी मजबूत किया गया है। धौलपुर, सवाई माधोपुर, बूंदी, करौली एवं कोटा जिलों में कुल 40 अत्यधिक संवेदनशील स्थलों की पहचान की गई है। फ्रंटलाइन वन अमले की सुरक्षा एवं अवैध गतिविधियों को मौके पर रोकने के लिए इन स्थलों पर 5-5 सशस्त्र होमगार्ड जवानों की तैनाती हेतु बजट स्वीकृत एवं आवंटित किया जा चुका है। इससे प्रशासनिक निगरानी को भी मजबूती मिलेगी।

संबंधित जिला कलेक्टर नोडल अधिकारी के रूप में कार्य कर रहे हैं। उपखंड स्तर पर राजस्व, पुलिस, वन एवं खनन विभाग की संयुक्त टीमें सप्ताह में दो बार जीपीएस लोकेशन एवं बॉडी-वॉर्न कैमरों के साथ आकस्मिक निरीक्षण कर रही हैं।

वैध बालू के विकल्प और जनभागीदारी पर भी जोर

अवैध खनन की रोकथाम के साथ-साथ दीर्घकालिक समाधान की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। बालू के वैध विकल्प को बढ़ावा देने के लिए एम-सैंड यूनिट्स की व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार की गई है। वहीं, अभयारण्य सीमा के अंतर्गत आने वाले राजस्व क्षेत्रों को वन क्षेत्र के रूप में अधिसूचित करने की संभावनाओं के परीक्षण के लिए जिला स्तरीय समितियों का गठन किया गया है।

जनभागीदारी सुनिश्चित करने के लिए डीओआईटी के माध्यम से एआई-एनालिटिक्स युक्त ऑनलाइन पब्लिक डैशबोर्ड तथा ‘राजस्थान संपर्क (181)’ पोर्टल पर क्यूआर कोड आधारित शिकायत प्रणाली को अंतिम रूप दिया जा रहा है। इसके माध्यम से आमजन गोपनीय रूप से जियो-टैग्ड फोटो एवं वीडियो सहित शिकायत दर्ज करा सकेंगे।

मुख्य सचिव ने संबंधित जिला कलेक्टरों, पुलिस अधीक्षकों एवं विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि आगामी सुनवाई से पूर्व 31 अगस्त तक की गतिविधियों का अद्यतन डाटा, जब्त वाहनों एवं मशीनरी का विवरण तथा विशेष लोक अभियोजकों की नियुक्ति की स्थिति शीघ्र संकलित कर प्रस्तुत की जाए।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार चंबल अभयारण्य की जैव विविधता तथा घड़ियालों एवं अन्य जलीय जीवों के प्राकृतिक वास के संरक्षण के लिए जीरो-टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। न्यायालय के सभी निर्देशों की अक्षरशः अनुपालना सुनिश्चित की जाएगी।

प्रभावी निगरानी के लिए राज्य स्तरीय समिति का गठन

उच्चतम न्यायालय के आदेशों की समयबद्ध अनुपालना एवं अंतर-विभागीय समन्वय सुनिश्चित करने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय ‘राज्य स्तरीय समन्वय एवं निगरानी समिति’ का गठन किया गया है। समिति में खान, वन, गृह, राजस्व, वित्त, परिवहन एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के उच्चाधिकारी तथा संबंधित पांच जिलों के जिला कलेक्टर सदस्य बनाए गए हैं। मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक को समिति का सदस्य सचिव बनाया गया है।

यह समिति अवैध खनन की रोकथाम, प्रवर्तन कार्रवाइयों, सर्विलांस सिस्टम तथा मासिक प्रगति रिपोर्ट की नियमित समीक्षा करेगी और आवश्यकता के अनुसार नीतिगत निर्देश जारी करेगी।

बैठक में खान, वन एवं पर्यावरण, गृह, वित्त, राजस्व, परिवहन, कानून, कार्मिक तथा सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के उच्चाधिकारी प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित रहे। संबंधित जिलों के जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, मुख्य वन संरक्षक एवं उप वन संरक्षक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में शामिल हुए।

यह संस्करण वेब न्यूज़/सरकारी प्रेस रिलीज दोनों के लिए उपयुक्त है और मूल तथ्यों को बरकरार रखते हुए भाषा को अधिक सुसंगत किया गया है।

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