जयपुर, 5 सितंबर। राजस्थान विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग की ओर से प्रख्यात समाजशास्त्री प्रो. एन.के. सिंघी की स्मृति में शनिवार को विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। व्याख्यान का विषय ‘समकालीन भारत में बदलते सामाजिक मुद्दों का परिदृश्य’ रहा। कार्यक्रम में भारतीय समाज, समाजशास्त्रीय चिंतन, सामाजिक परिवर्तन और समकालीन सामाजिक चुनौतियों के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा हुई।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के अतिरिक्त निदेशक डॉ. जी.एल. शर्मा ने आधुनिक समाजशास्त्रीय चिंतन को भारतीय सामाजिक दर्शन से जोड़ते हुए अपने विचार रखे। उन्होंने ‘वसुधैव कुटुम्बकम’, ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ और ‘मैं से हम की यात्रा’ के माध्यम से सामाजिक विकास की व्यापक अवधारणा को रेखांकित किया।
डॉ. शर्मा ने कहा कि वास्तविक विकास केवल आर्थिक प्रगति तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसके केंद्र में व्यक्ति, समाज और अंतिम व्यक्ति का कल्याण होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भारत को अपनी सामाजिक समस्याओं के समाधान के लिए पश्चिमी मॉडल की नकल करने की आवश्यकता नहीं है। देश की समृद्ध सामाजिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक परंपराओं के आधार पर भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप समाधान विकसित किए जा सकते हैं।
समाजशास्त्र विभाग की अध्यक्ष डॉ. मोनिका राव ने स्वागत उद्बोधन में विभाग की अकादमिक परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि समाजशास्त्र का भविष्य केवल यह समझने में नहीं है कि समाज में क्या बदल रहा है, बल्कि यह जानना भी जरूरी है कि इन बदलावों से किस प्रकार का समाज निर्मित हो रहा है।
उन्होंने कहा कि बदलते सामाजिक परिदृश्य में केवल प्रश्नों के उत्तर तलाशने के बजाय उत्तर पर भी सवाल उठाने की क्षमता विकसित करना जरूरी है। शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं देते हुए उन्होंने शिक्षक की भूमिका को विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण से जोड़ते हुए अपने विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम संयोजक डॉ. रोहित कुमार जैन ने बताया कि समाजशास्त्र विभाग की ओर से वर्ष 2003 से प्रो. एन.के. सिंघी की स्मृति में यह व्याख्यान निरंतर आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रो. सिंघी ने भारतीय समाज को भारतीय संदर्भों में समझने की समाजशास्त्रीय परंपरा को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
कार्यक्रम के दौरान शिक्षक दिवस के अवसर पर शिक्षकों का सम्मान भी किया गया। कार्यक्रम के अंत में सह-संयोजक डॉ. नीलम जोशी ने सभी का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर प्रो. अरविंद अग्रवाल, पूर्व कुलपति, मोतिहारी केंद्रीय विश्वविद्यालय सहित राजस्थान विश्वविद्यालय के अनेक शिक्षक एवं शोधार्थी उपस्थित रहे।
