10 सितंबर
मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में गुरुवार को प्रदेश में मादक पदार्थों की तस्करी एवं दुरुपयोग की रोकथाम के लिए ‘नारकोटिक्स कंट्रोल विजन 2026-29’ तैयार करने के संबंध में सचिवालय में बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रदेश में नशे के बढ़ते खतरे पर प्रभावी नियंत्रण, विभिन्न विभागों के बीच समन्वय और मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ कार्रवाई की समीक्षा की गई।
चार प्रमुख स्तंभों पर आधारित होगा विजन 2026-29
मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास ने सभी संबंधित विभागों को प्रदेश में मादक पदार्थों के खतरे की रोकथाम के लिए समन्वित एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि ‘नारकोटिक्स कंट्रोल विजन 2026-29’ में चार प्रमुख क्षेत्रों को प्रभावी रूप से शामिल किया जाए। इनमें प्रवर्तन, आसूचना एवं अभियान; प्रिकर्सर एवं सिंथेटिक ड्रग नियंत्रण; मांग एवं हानि न्यूनीकरण; तथा क्षमता निर्माण, समन्वय एवं निगरानी शामिल हैं।
मुख्य सचिव ने मादक पदार्थों से जुड़े मामलों में फॉरेंसिक जांच को प्रभावी और वैज्ञानिक तरीके से सुनिश्चित करने, जिलों में NCORD की बैठकें नियमित रूप से आयोजित करने तथा संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय एवं सूचनाओं के आदान-प्रदान को मजबूत करने के निर्देश दिए।
मादक पदार्थों की जब्ती में राजस्थान देश में अग्रणी
बैठक में बताया गया कि प्रदेश में अफीम, डोडा-पोस्त और एमडी जैसे मादक पदार्थों की जब्ती में तेजी आई है। इन मादक पदार्थों की जब्ती के मामलों में राजस्थान वर्तमान में देश में प्रथम स्थान पर है।
एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स द्वारा अब तक करीब 730 करोड़ रुपये मूल्य के मादक पदार्थ जब्त किए जा चुके हैं और 93 ड्रग किंगपिन गिरफ्तार किए गए हैं। इसके अलावा प्रदेश में 34 एमडी निर्माण फैक्ट्रियों का भंडाफोड़ कर मादक पदार्थों को नष्ट किया गया है।
मादक पदार्थों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई के लिए राज्य और जिला स्तर पर NCORD की नियमित बैठकें आयोजित की जा रही हैं। प्रदेश के 12 सर्वाधिक संवेदनशील जिलों पर विशेष ध्यान देते हुए नशा मुक्ति शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। वहीं, हॉटस्पॉट जिलों में निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया जा रहा है।
ड्रग तस्करों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, 5,626 मामले दर्ज
बैठक में बताया गया कि मादक पदार्थों की तस्करी एवं बिक्री में लिप्त व्यक्तियों के खिलाफ NDPS Act के तहत सख्त कार्रवाई की जा रही है। अब तक ऐसे 5,626 प्रकरण दर्ज किए जा चुके हैं।
बार-बार अपराध करने वाले आरोपियों की पहचान कर उनके खिलाफ स्वापक औषधियों और मन:प्रभावी पदार्थों के अवैध व्यापार की रोकथाम अधिनियम, 1988 के तहत कार्रवाई की जा रही है।
वहीं, नशामुक्त भारत अभियान के तहत विभिन्न विभागों के समन्वय से जागरूकता एवं आउटरीच कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इनके माध्यम से युवाओं और आमजन को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
शैक्षणिक संस्थानों के आसपास 500 मीटर की परिधि को ड्रग-फ्री बनाने के उद्देश्य से भी विशेष अभियान चलाया जा रहा है।
वरिष्ठ अधिकारियों ने लिया बैठक में भाग
बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव, गृह विभाग श्री भास्कर ए. सावंत, अतिरिक्त मुख्य सचिव, खेल एवं युवा मामले विभाग श्री प्रवीण गुप्ता, अतिरिक्त मुख्य सचिव, उद्योग एवं वाणिज्य विभाग श्री शिखर अग्रवाल तथा पुलिस महानिदेशक स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
राष्ट्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो और सीमा सुरक्षा बल (BSF) के अधिकारियों ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से बैठक में भाग लिया।
बैठक में पुलिस महानिरीक्षक श्री विकास कुमार ने विस्तृत पावर पॉइंट प्रस्तुतीकरण के माध्यम से प्रदेश में मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ की गई कार्रवाई की जानकारी दी। इस दौरान पुलिस, शिक्षा, उद्योग और स्वास्थ्य सहित विभिन्न विभागों द्वारा नशे के दुष्प्रभावों और मादक पदार्थों के अवैध कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए किए जा रहे प्रयासों की भी जानकारी दी गई।
