राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे शनिवार को विश्व हिंदू परिषद द्वारा आयोजित श्री अशोक सिंघल जन्म शताब्दी समारोह में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने अशोक सिंघल की स्मृति को नमन करते हुए उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व को अनुकरणीय बताया।
श्री बागडे ने कहा कि श्रद्धेय अशोक सिंघल केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि अपने आप में एक संस्था थे। सनातन संस्कृति के जीवन मूल्यों से जुड़ा उनका पूरा जीवन सनातन धर्म, राष्ट्र सेवा और समाज को एकजुट करने के लिए समर्पित रहा।
राज्यपाल ने कहा कि उनका जीवन भारतीय संस्कारों में रचा-बसा था और वे वेद एवं उपनिषदों के अध्ययन एवं भाष्य से भी जुड़े रहे। उनका मानना था कि हिंदू संस्कृति जीवन का आलोक-पथ है। इस संस्कृति के मर्म को समझने से मनुष्य में स्वतः नैतिकता, दूसरों के प्रति सम्मान और उदारता के भाव विकसित होते हैं। उन्होंने कहा कि अशोक सिंघल असाधारण व्यक्तित्व के धनी थे।
श्री बागडे ने कहा कि अशोक सिंघल ने अपने जीवन और कार्यों से सदैव लोगों को प्रेरित किया। उनका आदर्श था कि यदि एक संत एक समय में एक गांव को अपना ले, तो देश से गरीबी और अज्ञानता का नाश किया जा सकता है। उन्होंने हिंदू समाज में छुआछूत और सामाजिक असमानता को दूर करने के प्रयासों में साधु-संतों को भी सहभागी बनाया।
राज्यपाल ने अशोक सिंघल द्वारा छुआछूत मिटाने, सामाजिक समता के प्रसार और सनातन संस्कृति के संरक्षण एवं प्रसार के लिए किए गए कार्यों को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
