वित्तीय वर्ष 2026-27 के स्कीमेटिक बजट, व्यय प्रगति तथा केंद्र प्रायोजित योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की समीक्षा के लिए मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में मंगलवार को शासन सचिवालय में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में 28 सितंबर 2026 तक बजट व्यय की स्थिति, केंद्र से प्राप्त वित्तीय सहायता, विभिन्न योजनाओं में लंबित मदर सैंक्शन, विभागवार व्यय प्रगति तथा कम बजट उपयोग वाले विभागों के प्रदर्शन की विस्तृत समीक्षा की गई।
मुख्य सचिव ने कहा कि बजट का समयबद्ध एवं परिणामोन्मुख उपयोग सुनिश्चित करना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने सभी विभागों को योजनाओं एवं परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाते हुए उपलब्ध बजटीय संसाधनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
उन्होंने विभागीय अधिकारियों को प्रत्येक विभाग में व्यय की नियमित साप्ताहिक समीक्षा करने तथा हर 15 दिन में विस्तृत व्यय योजना तैयार कर वित्त विभाग को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इससे वित्तीय प्रबंधन की सतत निगरानी के साथ उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा।
बैठक में बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्य का कुल बजट प्रावधान 2 लाख 62 हजार 781 करोड़ रुपये है। इसके विरुद्ध 28 सितंबर 2026 तक 1 लाख 3 हजार 207 करोड़ रुपये व्यय किए जा चुके हैं, जो कुल बजट का लगभग 39 प्रतिशत है। कुल व्यय में राज्य निधि से 89 हजार 555 करोड़ रुपये तथा केंद्रीय सहायता से 13 हजार 651 करोड़ रुपये का व्यय शामिल है। इस दौरान विभिन्न विभागों की व्यय प्रगति, स्वीकृत बजट के सापेक्ष व्यय की गति तथा आगामी महीनों के लिए निर्धारित लक्ष्यों की भी समीक्षा की गई।
मुख्य सचिव ने केंद्र प्रायोजित योजनाओं के तहत लंबित मदर सैंक्शन, प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृतियों तथा अन्य प्रक्रियागत मामलों का शीघ्र निस्तारण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए संसाधनों का पूर्ण उपयोग सुनिश्चित किया जाए, ताकि योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी प्रकार की देरी न हो।
उन्होंने अधिकारियों को केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों एवं विभागों के साथ प्रभावी समन्वय बनाए रखते हुए लंबित प्रकरणों का त्वरित समाधान करने तथा योजनाओं के तहत उपलब्ध केंद्रीय सहायता का समय पर उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने कहा कि योजनाओं का वास्तविक लाभ सुनिश्चित करने के लिए सभी विभाग प्रभावी निगरानी व्यवस्था विकसित करें और नियमित समीक्षा करें। साथ ही, परियोजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली बाधाओं का त्वरित निराकरण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने विभागों को व्यय और उपलब्धियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी बल दिया।
बैठक में जल संसाधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री अभय कुमार, कौशल, रोजगार एवं उद्यमिता विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री संदीप वर्मा, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री कुलदीप रांका, वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री आनन्द कुमार, सार्वजनिक निर्माण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री प्रवीण गुप्ता, गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री भास्कर आत्माराम सावंत, जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री कुंजीलाल मीणा सहित विभिन्न विभागों के प्रमुख शासन सचिव, सचिव एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
