गांधी की प्रासंगिकता पर राजस्थान विश्वविद्यालय में कार्यक्रम

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राजस्थान विश्वविद्यालय के गांधी अध्ययन केंद्र में शुक्रवार को महात्मा गांधी की 157वीं जयंती के अवसर पर ‘वर्तमान परिप्रेक्ष्य में गांधी की प्रासंगिकता’ विषय पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान गांधीजी को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। साथ ही पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई।

कार्यक्रम की अध्यक्षता राजस्थान विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग की सेवानिवृत्त प्रोफेसर प्रो. मंजु शर्मा ने की। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने वर्तमान परिस्थितियों की समीक्षा करते हुए गांधीजी द्वारा बताए गए सादगी के मार्ग पर चलने का आह्वान किया।

कार्यक्रम की मुख्य वक्ता डॉ. गीता चतुर्वेदी ने ‘वर्तमान परिप्रेक्ष्य में गांधी की प्रासंगिकता’ विषय पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वर्तमान परिस्थितियों में गांधीजी के विचार अत्यंत प्रासंगिक हैं। उन्होंने कहा कि गांधीजी सत्य एवं अहिंसा पर आधारित जीवन जीने पर बल देते थे।

गांधी अध्ययन केंद्र की निदेशक डॉ. हंसा चौधरी ने गांधीजी के जीवन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए वर्तमान समय में उनके विचारों की प्रासंगिकता को स्पष्ट किया।

राजस्थान विश्वविद्यालय के संगीत विभाग की सहायक आचार्य डॉ. अंशु वर्मा के निर्देशन में विभाग के विद्यार्थियों ने गांधीजी के प्रिय भजनों की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं।

इस अवसर पर बड़ी संख्या में शिक्षक, अशैक्षणिक कर्मचारी, विभिन्न महाविद्यालयों के शिक्षक, शोधार्थी, विद्यार्थी एवं अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम में प्रो. पी.सी. माली, प्रो. मंजु शर्मा, प्रो. सुनीता शर्मा, प्रो. मधु मुकुल चतुर्वेदी, डॉ. इंद्रा चतुर्वेदी, डॉ. दीपक यादव, डॉ. नेहा भारतीया, डॉ. नीलम पुनार, डॉ. पूनम, डॉ. आशुराज आनंद, डॉ. उम्मेद सिंह, डॉ. राजश्री स्वामी, डॉ. राम प्रकाश भारी, नमोनारायण मीणा, गौरव शर्मा सहित विभिन्न विभागों के शिक्षक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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