राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने कहा कि संगीत व्यक्ति की रचनात्मक ऊर्जा को बढ़ाता है। राजस्थान के कण-कण में संगीत रचा-बसा है। उन्होंने कहा कि सामवेद से भारतीय संगीत की उत्पत्ति मानी जाती है। भारतीय संगीत केवल मन का रंजन ही नहीं करता, बल्कि जीवन को उमंग और उत्साह से भर देता है।
राज्यपाल शुक्रवार को एक निजी होटल में ‘सुर संगम’ संस्थान के 37वें राष्ट्रीय समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने राजस्थान के विरल लोक एवं शास्त्रीय संगीत को देश-दुनिया तक पहुंचाने में स्वर्गीय के.सी. मालू के प्रयासों को स्मरण करते हुए उनकी स्मृति को नमन किया।
श्री बागडे ने पंडित ओंकार नाथ ठाकुर के गायन से इटली के तत्कालीन शासक मुसोलिनी के अनिद्रा रोग दूर होने से जुड़े प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय संगीत ध्यान की परंपरा और ज्ञान से जुड़ा हुआ है। उन्होंने जयपुर-अतरौली घराने, पंडित रामनारायण, पंडित विश्वमोहन भट्ट सहित अन्य संगीत साधकों के योगदान को स्मरण करते हुए कहा कि इन सभी ने संगीत के क्षेत्र में राजस्थान को गौरवान्वित किया है।
उन्होंने पंडित विष्णु दिगम्बर पलुस्कर द्वारा संगीतबद्ध भजन ‘रघुपति राघव राजा राम’ का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके मूल रचयिता के रूप में पंडित लक्ष्मणाचार्य का उल्लेख मिलता है। उन्होंने बताया कि भजन के मूल बोल—“रघुपति राघव राजाराम। पतित पावन सीताराम। सुंदर विग्रह मेघाश्याम। गंगा तुलसी शालीग्राम।”—हैं। यह भजन आज भी जन-जन में लोकप्रिय है।
इससे पहले राज्यपाल श्री बागडे ने हुलाश पुरोहित को ‘सुर संगम’ का एक लाख रुपये का मिलाप कोठारी पुरस्कार प्रदान किया। उन्होंने दीपक पंडित को ‘सुर संगम गौरव सम्मान’ से सम्मानित किया। इसके साथ ही संगीतकार दीपक माथुर तथा ‘सुर संगम’ प्रतियोगिता में 10 राज्यों से चयनित प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र एवं प्रतीक चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया।
इस अवसर पर ‘सुर संगम’ के प्रमुख श्री हेमजीत मालू और ‘स्वर सरिता’ पत्रिका के संपादक डॉ. देवदत्त शर्मा ने राज्यपाल को स्वर्गीय के.सी. मालू की स्मृति में प्रकाशित विशेषांक भेंट किया।
कार्यक्रम में देशभर से आए युवा संगीत प्रतिभाओं ने मनोहारी लोक एवं शास्त्रीय संगीत प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। राज्यपाल ने कलाकारों की प्रतिभा की सराहना करते हुए उन्हें उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।
