8 सितंबर
मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने मंगलवार को शासन सचिवालय में इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (ICJS), साइबर सुरक्षा और नवीन आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन की समीक्षा की। बैठक में आपराधिक न्याय प्रणाली से जुड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म, साइबर अपराधों से निपटने की व्यवस्था और नए कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन पर चर्चा हुई।
डिजिटल एकीकरण मजबूत करने पर जोर
मुख्य सचिव ने ICJS के तहत आपराधिक न्याय प्रणाली के विभिन्न स्तंभों के बीच डिजिटल एकीकरण को और मजबूत करने के निर्देश दिए। उन्होंने ई-समन की इलेक्ट्रॉनिक तामील में सुधार के साथ फॉरेंसिक, कारागार, अभियोजन और मेडिको-लीगल व्यवस्थाओं के डिजिटल इंटीग्रेशन को प्रभावी बनाने पर जोर दिया।
उन्होंने शेष तकनीकी और प्रक्रियात्मक कमियों को जल्द दूर करने के निर्देश दिए। नवीन आपराधिक कानूनों से संबंधित राष्ट्रीय डैशबोर्ड पर ICJS इंटीग्रेशन में राजस्थान को 10 में से 10 अंक मिले हैं। प्रदेश के सभी 1,040 पुलिस थानों में राजनेट कनेक्टिविटी सुनिश्चित की जा चुकी है।
अतिरिक्त मुख्य सचिव, गृह भास्कर आत्माराम सावंत ने बताया कि मेडिको-लीगल एग्जामिनेशन एंड पोस्ट-मॉर्टम रिपोर्टिंग (MedLEaPR) का CCTNS के साथ एकीकरण पूरा हो चुका है। सभी जिले ई-प्रॉसिक्यूशन पर भी ऑनबोर्ड हैं।
साइबर फ्रॉड पीड़ितों को जल्द राहत
साइबर अपराधों की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने होल्ड की गई साइबर फ्रॉड की राशि पीड़ितों को जल्द वापस दिलाने को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने मनी रेस्टोरेशन मॉड्यूल के प्रभावी उपयोग और ग्रिवांस रिड्रेसल मॉड्यूल पर प्राप्त शिकायतों के समयबद्ध निस्तारण पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि साइबर फ्रॉड के मामलों में पुलिस और बैंकों के बीच बेहतर समन्वय से पीड़ितों को त्वरित राहत मिलनी चाहिए।
मुख्य सचिव ने साइबर क्राइम हॉटस्पॉट पर फोकस्ड कार्रवाई के निर्देश दिए और पुलिस, बैंकों तथा संबंधित हितधारकों के साथ इस विषय पर जल्द अलग समीक्षा बैठक आयोजित करने को कहा। साथ ही साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए सहयोग पोर्टल और समन्वय पोर्टल के प्रभावी उपयोग तथा कानून प्रवर्तन एजेंसियों की साइबर क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया।
नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर
मुख्य सचिव ने कहा कि नवीन आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन में राजस्थान ने प्रगति की है, लेकिन अभी और सुधार की गुंजाइश है। उन्होंने कानूनों की मूल भावना और उद्देश्य को सर्वोपरि रखते हुए प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
उन्होंने ई-समन, ई-साक्ष्य और फॉरेंसिक जांच जैसी तकनीक आधारित व्यवस्थाओं के अधिक प्रभावी उपयोग तथा गंभीर अपराधों की जांच में वैज्ञानिक साक्ष्यों के इस्तेमाल पर जोर दिया।
पुलिस महानिदेशक राजीव शर्मा ने बताया कि FSL निरीक्षण की दर में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। जांच अधिकारियों का ई-साक्ष्य ऐप पर शत-प्रतिशत पंजीकरण और प्रशिक्षण पूरा किया जा चुका है तथा इसके उपयोग के लिए 8,500 डिवाइस उपलब्ध कराए गए हैं।
उन्होंने बताया कि 31 अगस्त तक 4 लाख 57 हजार से अधिक FIR में ई-साक्ष्य तैयार किए गए और 7 लाख 39 हजार से अधिक साक्ष्य आईडी बनाई एवं अपलोड की गईं।
उन्होंने बताया कि 1 जुलाई 2024 से 31 अगस्त 2026 तक नवीन आपराधिक कानूनों के तहत प्रदेश में 4 लाख 12 हजार 203 प्रकरण दर्ज हुए। इनमें से 3 लाख 71 हजार 244 प्रकरणों का चालान या अंतिम रिपोर्ट के माध्यम से निस्तारण किया जा चुका है, जो कुल दर्ज मामलों का 90.10 प्रतिशत है।
बैठक में विधि एवं विधिक कार्य, गृह, कारागार, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, पुलिस अपराध शाखा, अभियोजन, राजस्थान उच्च न्यायालय, सूचना प्रौद्योगिकी, SCRB, राज्य विधि विज्ञान प्रयोगशाला, NIC सहित संबंधित विभागों एवं संस्थाओं के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
