9 सितंबर
मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में बुधवार को शासन सचिवालय में केंद्र सरकार द्वारा आयोजित पंचम मुख्य सचिव सम्मेलन में निर्धारित आर्थिक, नियामक एवं प्रक्रियात्मक सुधारों से संबंधित 28 प्राथमिकताओं के क्रियान्वयन की समीक्षा बैठक आयोजित की गई।
बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव, उद्योग एवं वाणिज्य विभाग श्री शिखर अग्रवाल, प्रमुख शासन सचिव, वित्त विभाग श्री वैभव गालरिया, प्रमुख शासन सचिव, राजस्व विभाग श्री टी. रविकांत सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक में बताया गया कि केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित 28 प्राथमिकताओं में से राजस्थान में अब तक 22 प्राथमिकताओं का क्रियान्वयन पूर्ण किया जा चुका है, जबकि शेष 6 प्राथमिकताओं पर कार्य जारी है। 22 प्राथमिकताओं के सफल क्रियान्वयन के साथ राजस्थान वर्तमान में इनके क्रियान्वयन के मामले में देश का अग्रणी राज्य बनकर उभरा है।
मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि शेष 6 प्राथमिकताओं को भी संबंधित विभागों के बीच प्रभावी समन्वय एवं सहयोग के साथ शीघ्र पूरा किया जाए। उन्होंने नियमों के सरलीकरण, अनावश्यक प्रावधानों में कमी तथा डीरेगुलेशन की दिशा में प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए, ताकि राज्य में व्यवसाय संचालन को और अधिक सुगम बनाया जा सके तथा सुधारों के माध्यम से निवेश एवं आर्थिक गतिविधियों को गति मिल सके।
नियमों के सरलीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण सुधार
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि प्राथमिकताओं के क्रियान्वयन के तहत विभिन्न क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण सुधार किए गए हैं। फायर सेफ्टी नियमों को तीन भागों में पुनर्गठित करते हुए एकल फायर एनओसी का प्रावधान किया गया है। इसी प्रकार, विद्युत कनेक्शन की प्रक्रिया को सरल बनाते हुए 33 केवी तक के सभी श्रेणी के कनेक्शनों के लिए स्व-घोषणा के आधार पर कनेक्शन की व्यवस्था की जा रही है।
निजी विद्यालयों के लिए भी दस्तावेजी आवश्यकताओं में उल्लेखनीय कमी की गई है। मान्यता के लिए आवश्यक दस्तावेजों की संख्या 28 से घटाकर 16 तथा संबद्धता के लिए आवश्यक दस्तावेजों की संख्या 31 से घटाकर 18 कर दी गई है।
इसके अतिरिक्त, कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए भौतिक पुस्तकालय के साथ डिजिटल लाइब्रेरी की अनुमति, विद्यालय परिसर से 100 मीटर के भीतर उपलब्ध सामुदायिक पार्क अथवा अन्य भूमि को खेल मैदान के रूप में उपयोग करने की सुविधा तथा एंडोमेंट फंड की अनिवार्यता समाप्त करने जैसे महत्वपूर्ण सुधार किए गए हैं।
चिकित्सा क्षेत्र में भी प्रक्रिया को सरल बनाते हुए अन्य राज्यों की मेडिकल काउंसिल से एनओसी लेने की आवश्यकता समाप्त कर दी गई है।
इन सुधारों के माध्यम से राज्य में नियामकीय प्रक्रियाओं को सरल, पारदर्शी एवं व्यवसाय-अनुकूल बनाने के साथ निवेश और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं।
