10 सितंबर
पशुपालन, गोपालन एवं देवस्थान मंत्री श्री जोराराम कुमावत ने कहा कि प्रदेश सरकार पशुओं के कल्याण के प्रति पूरी तरह समर्पित है। उन्होंने कहा कि लंपी रोग को लेकर पशुपालकों को घबराने की आवश्यकता नहीं है। राज्य सरकार पूरी तरह सतर्क है और रोग की रोकथाम के लिए सभी आवश्यक एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं।
पशुपालन मंत्री ने कहा कि पशुपालकों को लंपी रोग से भयभीत होने की जरूरत नहीं है। विभाग पूरी मुस्तैदी से कार्य कर रहा है। जहां भी रोग के मामले सामने आ रहे हैं, वहां तत्काल आवश्यक उपाय किए जा रहे हैं। विभाग के पास पर्याप्त मात्रा में औषधियां उपलब्ध हैं। रोगी गौवंश को तत्काल आइसोलेट कर उनके समुचित उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है।
श्री कुमावत ने बताया कि इस वर्ष पूर्वी राजस्थान में लंपी रोग के मामले अधिक सामने आए हैं, हालांकि वहां भी स्थिति नियंत्रण में है। अब तक भरतपुर और डीग जिलों में लंपी रोग के कारण कुल 16 गौवंश की मृत्यु हुई है। अधिकांश गौवंश को उपचार के बाद रोगमुक्त किया जा चुका है, जबकि करीब 4,500 गौवंश का उपचार जारी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही शेष गौवंश भी स्वस्थ हो जाएंगे।
टीकाकरण और जागरूकता पर जोर
मंत्री ने कहा कि रोग को नियंत्रित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। इनमें टीकाकरण और जागरूकता अभियान प्रमुख हैं। लंपी रोग से बचाव के लिए टीकाकरण महत्वपूर्ण उपाय है। इसी को देखते हुए राज्य सरकार ने गौवंश के टीकाकरण पर विशेष जोर दिया है, ताकि रोग के प्रसार को समय रहते रोका जा सके।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2026-27 में अब तक करीब 90 प्रतिशत गौवंश का टीकाकरण किया जा चुका है। इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाकर पशुपालकों को लंपी रोग के लक्षण, बचाव और उपचार के संबंध में जानकारी दी जा रही है।
लंपी रोग संक्रामक बीमारी, सावधानी जरूरी
पशुपालन मंत्री ने कहा कि लंपी रोग पशुओं में होने वाला एक संक्रामक रोग है, जिससे मुख्य रूप से गौवंश प्रभावित होते हैं। इसके कारण पशुपालकों को आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ता है। प्रदेश पहले भी इस रोग का सामना कर चुका है, इसलिए सरकार इस बार इसके नियंत्रण और रोकथाम के लिए पहले से सक्रिय है।
उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष भी दो माह का विशेष टीकाकरण अभियान चलाया गया था, जिसके तहत राज्य के करीब 95 प्रतिशत गौवंश का टीकाकरण किया गया। इससे रोग को समय रहते नियंत्रित करने में मदद मिली और गौवंश की हानि लगभग नगण्य रही।
श्री कुमावत ने विभाग की तैयारियों की सराहना करते हुए कहा कि लंपी रोग के सर्वेक्षण, निदान और नियंत्रण के लिए समय रहते आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं।
पशुपालकों से विशेष निगरानी की अपील
पशुपालन मंत्री ने पशुपालकों से अपने गौवंश की विशेष निगरानी रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर तत्काल नजदीकी पशु चिकित्सा संस्थान या पशु चिकित्सक से संपर्क करें।
उन्होंने पशुपालकों से यह भी कहा कि संक्रमित या बीमार गौवंश को अन्य पशुओं से अलग रखें तथा प्रभावित क्षेत्रों से नए पशुओं को लाने या वहां से पशुओं को दूसरे स्थान पर ले जाने से बचें।
