जयपुर, 5 सितंबर। राज्य में किशोर न्याय अधिनियम, 2015 के लागू होने के दस वर्ष पूरे होने के अवसर पर राजस्थान उच्च न्यायालय की किशोर न्याय समिति के तत्वावधान में 6 सितंबर 2026 को राज्य स्तरीय परामर्श कार्यक्रम ‘चिंतन—एक दशक की पहल’ आयोजित किया जाएगा।
कार्यक्रम का आयोजन सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक राजस्थान पुलिस अकादमी, जयपुर में होगा। राजस्थान उच्च न्यायालय, राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग और यूनिसेफ के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में किशोर न्याय व्यवस्था की पिछले एक दशक की प्रगति और भविष्य की दिशा पर मंथन किया जाएगा।
बाल सुरक्षा और पुनर्वास व्यवस्था की होगी समीक्षा
परामर्श कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किशोर न्याय प्रणाली की प्रभावशीलता की समीक्षा करना तथा बच्चों, विशेषकर दिव्यांग बच्चों, के संरक्षण, देखभाल, पुनर्वास और न्याय सेवाओं तक पहुंच को और बेहतर बनाने के लिए आवश्यक सुधारों पर चर्चा करना है।
कार्यक्रम में किशोर न्याय अधिनियम के क्रियान्वयन से हासिल उपलब्धियों, परिणामों और अब भी मौजूद चुनौतियों का भी आकलन किया जाएगा।
बाल कल्याण से जुड़ी संस्थाओं के कामकाज पर चर्चा
कार्यक्रम में बाल कल्याण समिति, किशोर न्याय बोर्ड, बाल न्यायालय और जिला बाल संरक्षण इकाई सहित बाल संरक्षण से जुड़ी विभिन्न संस्थाओं की कार्यप्रणाली और तत्परता पर चर्चा होगी।
देखभाल एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों तथा कानून के संपर्क में आने वाले बच्चों की पहचान, उन तक पहुंच और उन्हें आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था को भी चर्चा के केंद्र में रखा जाएगा।
मिशन वात्सल्य और बाल संरक्षण व्यवस्था पर मंथन
राज्य स्तरीय कार्यक्रम में बाल संरक्षण एवं किशोर न्याय व्यवस्था को मजबूत करने, विभिन्न संस्थाओं के बीच समन्वय, केस मैनेजमेंट, कानूनी सहायता, गवाहों की सुरक्षा और पुनर्वास जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श होगा।
इसके अलावा मिशन वात्सल्य के तहत संस्थागत देखभाल के अलावा बच्चों के लिए उपलब्ध वैकल्पिक सहायता और देखभाल की व्यवस्थाओं पर भी चर्चा की जाएगी।
पांच तकनीकी सत्रों में होगी विस्तृत चर्चा
कार्यक्रम में पांच तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे। इनमें गोद लेना, देखभाल एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों के अधिकार, कानून के संपर्क में आने वाले बच्चों के अधिकार, गंभीर अपराधों में किशोर न्याय बोर्ड की प्रारंभिक जांच तथा ‘किशोर न्याय अधिनियम के दस वर्ष—सबूत, जवाबदेही और आगे की राह’ जैसे विषय शामिल होंगे।
अंतिम सत्र में विभिन्न राज्यों से प्राप्त अनुभवों और राष्ट्रीय स्तर के आंकड़ों के आधार पर डेटा एवं जवाबदेही, सुरक्षा सेवाओं तक पहुंच तथा कानूनी फैसलों और प्रशासन की प्रभावशीलता जैसे मुद्दों पर समेकित चर्चा की जाएगी।
कार्यक्रम में राजस्थान उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों, न्यायिक अधिकारियों के साथ राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग, बाल अधिकारिता विभाग, शिक्षा, चिकित्सा, महिला एवं बाल विकास तथा पुलिस विभाग के अधिकारी शामिल होंगे।
कार्यक्रम से प्राप्त सुझावों और निष्कर्षों के आधार पर किशोर न्याय व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने, बच्चों तक सुरक्षा एवं सहायता सेवाओं की पहुंच बढ़ाने और संस्थागत जवाबदेही मजबूत करने की दिशा में आवश्यक सुधारों पर सहमति बनाने का प्रयास किया जाएगा। साथ ही, इन निष्कर्षों का उपयोग आगामी दशक के लिए राष्ट्रीय स्तर पर रोडमैप तैयार करने में भी किया जा सकेगा।
