राजस्थान विवि में वृद्धजन दिवस पर एसटीटीपी शुरू

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वृद्धजन दिवस के अवसर पर राजस्थान विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग द्वारा ‘एजिंग विद डिग्निटी: लर्निंग, रिसर्च एंड फील्ड एक्सपीरियंस’ विषय पर सात दिवसीय अल्पकालिक प्रशिक्षण कार्यक्रम (एसटीटीपी) का शुभारंभ किया गया। शिल्पी मेमोरियल ट्रस्ट एवं मानव सेवा ट्रस्ट राजस्थान के सहयोग से आयोजित कार्यक्रम का उद्घाटन विश्वविद्यालय परिसर स्थित दर्शनशास्त्र विभाग के सेमिनार हॉल में प्रातः 11:30 बजे हुआ।

कार्यक्रम का उद्देश्य वृद्धावस्था को केवल जीवन की एक अवस्था के रूप में नहीं, बल्कि अनुभव, सामाजिक ज्ञान, संस्कृति और मानवीय संबंधों के महत्वपूर्ण आयाम के रूप में समझना तथा विद्यार्थियों को सार्थक क्षेत्रीय अनुभव प्रदान करना है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता राजस्थान विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. भगवती प्रसाद सारस्वत ने की। कार्यक्रम का शुभारंभ स्वागत उद्बोधन, दीप प्रज्वलन एवं भारत माली द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना के साथ हुआ।

समाजशास्त्र विभाग की अध्यक्ष एवं कार्यक्रम संयोजक डॉ. मोनिका राव ने कहा कि ‘एजिंग विद डिग्निटी’ केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि वृद्धावस्था अध्ययन के क्षेत्र में विभाग की एक दशक लंबी शैक्षणिक, शोधपरक एवं क्षेत्रीय सहभागिता का हिस्सा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2016 में विभाग में ‘सोशियोलॉजी ऑफ एजिंग’ को एक विशिष्ट प्रश्नपत्र के रूप में प्रारंभ किया गया था। इसके साथ ही शोध पद्धति, स्वस्थ वृद्धावस्था एवं संज्ञानात्मक वृद्धावस्था के क्षेत्र में भी विभिन्न शैक्षणिक पहल की गई हैं।

डॉ. राव ने बताया कि पिछले पाँच वर्षों से विद्यार्थियों को क्षेत्रीय सर्वेक्षण एवं आकलन के लिए वृद्धाश्रमों में ले जाने के अनुभव के आधार पर इस प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत की गई है। संयुक्त राष्ट्र के स्वस्थ वृद्धावस्था दशक (2021–2030) के संदर्भ में विद्यार्थियों को क्षेत्रीय भ्रमण के माध्यम से चार वृद्धाश्रमों से जोड़ने की योजना भी बनाई गई है। उन्होंने कहा कि इससे युवाओं की ऊर्जा और वरिष्ठ नागरिकों के अनुभव के बीच सार्थक संवाद स्थापित करने में मदद मिलेगी।

उन्होंने ‘क्वांटम विलेज’ की अवधारणा को समाजशास्त्रीय संबंधपरक रूपक के रूप में प्रस्तुत करते हुए स्पष्ट किया कि यह कोई वैज्ञानिक या चिकित्सकीय मॉडल नहीं है। इस अवधारणा में वृद्धजनों को परिवार, युवाओं और व्यापक समुदाय से जुड़े सक्रिय भागीदार के रूप में देखा गया है। उन्होंने विश्वविद्यालय के प्राध्यापकों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए सेवानिवृत्ति विदाई समारोह की पहल शुरू करने के लिए कुलपति के प्रति आभार व्यक्त किया।

अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलपति प्रो. भगवती प्रसाद सारस्वत ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस केवल एक औपचारिक आयोजन तक सीमित न रहकर भारतीय सामाजिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों पर चिंतन का अवसर बनना चाहिए। उन्होंने संयुक्त परिवारों से एकल परिवारों की ओर बढ़ते रुझान तथा बदलते अंतर-पीढ़ीगत संबंधों को समाजशास्त्रीय अध्ययन का महत्वपूर्ण विषय बताया।

उन्होंने कहा कि समाजशास्त्र विभाग की भूमिका केवल शोध, प्रकाशन एवं संगोष्ठियों तक सीमित नहीं है, बल्कि बदलती सामाजिक संरचनाओं और पारिवारिक संबंधों पर निरंतर संवाद स्थापित करना भी उसका दायित्व है। उन्होंने बुजुर्गों को परिवार, समाज और संस्कृति की जीवंत स्मृति बताते हुए युवाओं से उनके साथ जुड़ाव को केवल सामाजिक सेवा के प्रमाणपत्र तक सीमित न रखने का आह्वान किया।

प्रो. सारस्वत ने कहा कि गरिमामय वृद्धावस्था सम्मान, सहभागिता, स्वायत्तता, सुरक्षा और सार्थकता जैसे पाँच मूल सिद्धांतों पर आधारित है। उन्होंने ऐसे समाज के निर्माण पर बल दिया, जो ‘गरिमा के साथ वृद्धावस्था’ से आगे बढ़कर ‘गरिमा के साथ जीवन’ और ‘साथ-साथ आगे बढ़ने’ की भावना को अपनाए। उन्होंने सकारात्मक वृद्धावस्था की अवधारणा पर आधारित स्वस्थ वृद्धावस्था विषयक प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम शुरू करने की विभागीय पहल को भी स्वीकृति प्रदान की।

विशिष्ट अतिथि एवं प्रख्यात समाजशास्त्री-लेखिका प्रो. ऋतु सारस्वत ने वृद्धजनों को सामाजिक शक्ति, अनुभव एवं ज्ञान का महत्वपूर्ण स्रोत बताया। उन्होंने पीढ़ियों के बीच संवाद को समाज की प्रमुख आवश्यकता बताते हुए अकेलेपन, भावनात्मक सुरक्षा, विश्वास और सुनने की संस्कृति पर जोर दिया। उन्होंने युवाओं से बुजुर्गों के साथ सक्रिय संवाद एवं सहभागिता बढ़ाने का आह्वान किया।

श्री पी.सी. जैन ने ‘टाइम बैंक’ की अवधारणा तथा वरिष्ठ नागरिकों के लिए इसके महत्व पर प्रकाश डालते हुए युवाओं से इस पहल में सहयोग करने का आग्रह किया।

इस अवसर पर वृद्धावस्था अध्ययन एवं वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए ‘रिसर्च एक्सीलेंस एंड सर्विस टू सोसाइटी अवार्ड’ प्रदान किए गए। समाजशास्त्र के क्षेत्र में लेखन के लिए राजस्थान सरकार के उच्च शिक्षा विभाग की समाजशास्त्री प्रो. ऋतु सारस्वत, जरा-विज्ञान के क्षेत्र में प्रतिष्ठित प्रकाशनों के लिए राजस्थान विश्वविद्यालय के गृह विज्ञान विभाग की अध्यक्ष प्रो. शुभा दुबे तथा जरा-विज्ञान में उल्लेखनीय शोध के लिए जयपुर स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ डेवलपमेंट स्टडीज के डॉ. हरचंद को सम्मानित किया गया।

वृद्धावस्था अध्ययन एवं वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण में योगदान के लिए शिल्पी मेमोरियल ट्रस्ट एवं मानव सेवा ट्रस्ट द्वारा समाजशास्त्र विभाग की अध्यक्ष डॉ. मोनिका राव को भी सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय, कोटा के कुलपति की गरिमामयी उपस्थिति रही।

कार्यक्रम के दौरान विभाग के विद्यार्थियों ने मानव सेवा ट्रस्ट एवं विभिन्न वृद्धाश्रमों से आए वरिष्ठ नागरिकों को समर्पित सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। वरिष्ठ नागरिकों ने भी कार्यक्रम में सक्रिय सहभागिता की। इस अवसर पर कुलपति प्रो. भगवती प्रसाद सारस्वत एवं डॉ. मोनिका राव ने शिल्पी मेमोरियल ट्रस्ट के श्री रामजस जी तथा मानव सेवा ट्रस्ट के श्री कौशल सत्यार्थी जी को सम्मानित किया।

मानव सेवा ट्रस्ट राजस्थान ने अपनी स्थापना के दस वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर विवरणिका का विमोचन भी किया।

सत्र का समापन डॉ. संदीप कुमार के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। कार्यक्रम के आयोजन एवं समन्वय में उनके प्रयासों की सराहना की गई। शैक्षणिक विमर्श, वृद्धजनों के जीवनानुभव, युवा सहभागिता और सामाजिक उत्तरदायित्व को एक सूत्र में जोड़ते हुए यह कार्यक्रम पीढ़ियों के बीच संवाद तथा गरिमामय वृद्धावस्था की दिशा में एक सार्थक मंच के रूप में सामने आया।

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