सचिव श्री वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में मंगलवार को शासन सचिवालय में संस्कृत शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में संस्कृत भाषा एवं शिक्षा के संरक्षण, संवर्धन तथा विभागीय गतिविधियों की प्रगति पर विस्तार से चर्चा की गई।
मुख्य सचिव ने कहा कि संस्कृत समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर है और इसके संरक्षण एवं संवर्धन के लिए गंभीरता से प्रयास किए जाने चाहिए। उन्होंने संस्कृत भाषा को विभिन्न क्षेत्रों में प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए।
उन्होंने संस्कृत भाषा में उपलब्ध ताम्रपत्रों का उचित कैटलॉग तैयार कर उनका डिजिटल रूपांतरण करने के निर्देश दिए, ताकि इस ऐतिहासिक सामग्री को सुरक्षित रखते हुए भावी पीढ़ियों के लिए सुलभ बनाया जा सके।
मुख्य सचिव ने संस्कृत के अध्ययन, अनुसंधान एवं प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देने के लिए समय-समय पर राष्ट्रीय स्तर की कार्यशालाएं आयोजित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन कार्यशालाओं में प्रदेश एवं देश के प्रमुख विद्वानों और विशेषज्ञों को आमंत्रित किया जाए।
संस्कृत शिक्षा को रोजगार एवं करियर से जोड़ने पर जोर
मुख्य सचिव ने संस्कृत विद्यालयों में संचालित कार्यक्रमों एवं पढ़ाए जा रहे विषयों की समीक्षा करते हुए शिक्षा को रोजगार एवं करियर के अवसरों से जोड़ने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप बेहतर मार्गदर्शन और अवसर उपलब्ध कराए जाने चाहिए।
उन्होंने पीएम श्री विद्यालयों की तर्ज पर प्रधानाचार्यों एवं प्राचार्यों को आमंत्रित कर संस्कृत भाषा पर कार्यशाला आयोजित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस तरह की पहल से संस्कृत शिक्षा के प्रति विद्यार्थियों एवं शिक्षण संस्थानों में रुचि बढ़ाने तथा इसे मुख्यधारा से जोड़ने में मदद मिलेगी।
बैठक में जगद्गुरु रामानंदाचार्य राजस्थान विश्वविद्यालय के कुलगुरु मदन मोहन झा, विश्वविद्यालय की रजिस्ट्रार गुंजन सोनी, संस्कृत शिक्षा विभाग की आयुक्त सुश्री प्रियंका जोधावत सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
