उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने आज नई दिल्ली में मुख्य अतिथि के रूप में 11वें संत ईश्वर सम्मान-2026 समारोह में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने समाज की अनुकरणीय एवं निःस्वार्थ सेवा के लिए चयनित व्यक्तियों और संगठनों को संत ईश्वर सेवा सम्मान प्रदान किए।
समारोह को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि संत ईश्वर सम्मान निःस्वार्थ सेवा की भावना का सम्मान है और यह भारत की करुणा, सेवा तथा सामाजिक उत्तरदायित्व की समृद्ध संस्कृति का उत्सव है। उन्होंने सभी पुरस्कार विजेताओं को राष्ट्र और समाज के प्रति उनके असाधारण योगदान के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने संत ईश्वर फाउंडेशन और राष्ट्रीय सेवा भारती की सराहना करते हुए कहा कि इन संस्थाओं ने पुरस्कारों की स्थापना कर इस पहल को लगातार 11 वर्षों तक बनाए रखा है। उन्होंने कहा कि समाज को सशक्त बनाने और राष्ट्र को अधिक समावेशी बनाने के लिए मौन भाव से कार्य कर रहे अनगिनत व्यक्तियों को सम्मानित करके ये पुरस्कार अन्य लोगों को भी सेवा के मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं।
सेवा की भारत की सदियों पुरानी परंपरा का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा, “हमारी सभ्यतागत लोकाचार एवं संस्कृति ने हमें हमेशा सिखाया है—‘नर सेवा ही नारायण सेवा है।’” उन्होंने कहा कि भारत के महान संतों और विचारकों ने सदैव लोगों को स्वार्थ की संकीर्ण सीमाओं से ऊपर उठकर दूसरों के कल्याण के लिए स्वयं को समर्पित करने की प्रेरणा दी है।
‘विकसित भारत @ 2047’ के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि विकास को केवल आर्थिक वृद्धि, बुनियादी ढांचे या तकनीकी प्रगति के आधार पर नहीं मापा जा सकता। उनके अनुसार, सही अर्थों में विकसित भारत वह होगा, जहां प्रत्येक नागरिक गरिमा, अवसर और आशा का अनुभव करे।
उन्होंने कहा कि राष्ट्र की प्रगति में प्रत्येक नागरिक एक हितधारक है और सेवा संगठनों तथा समर्पित व्यक्तियों का कार्य जमीनी स्तर पर राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। स्वच्छ भारत मिशन का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि इस पहल ने यह प्रदर्शित किया है कि किस प्रकार ‘जन भागीदारी’ किसी सरकारी कार्यक्रम को एक व्यापक जन आंदोलन में परिवर्तित कर सकती है।
उपराष्ट्रपति ने युवाओं के स्वास्थ्य और भविष्य के लिए नशीले पदार्थों एवं मादक द्रव्यों के सेवन से उत्पन्न गंभीर खतरे पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने उल्लेख किया कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने इस वर्ष अगस्त में ‘नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान’ की शुरुआत की थी, जबकि केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने ‘नशा मुक्त भारत 2029 रोडमैप’ लॉन्च किया था। उन्होंने कहा कि दोनों पहलें नशा मुक्त भारत के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
अपने संबोधन के समापन पर श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने विकास के साथ-साथ करुणा, चरित्र और सामाजिक उत्तरदायित्व को भी समान महत्व देने पर बल दिया। उन्होंने सभी पुरस्कार विजेताओं को पुनः बधाई देते हुए आशा व्यक्त की कि उनका जीवन और सेवा अधिक से अधिक नागरिकों, विशेषकर युवाओं को समाज के कल्याण के लिए स्वयं को समर्पित करने तथा सेवा और कर्तव्य-बोध की भावना को मजबूत करने के लिए प्रेरित करेगी।
