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वैश्विक सहयोग पर राधाकृष्णन का जोर

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उपराष्ट्रपति भवन में ‘इंटरनेशनल स्ट्रैटेजिक एंगेजमेंट प्रोग्राम’ (IN-STEP) के चौथे संस्करण के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने 38 अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों और भारतीय प्रतिभागियों का स्वागत किया। उन्होंने मित्रवत एवं समान विचारधारा वाले देशों, जिनमें ग्लोबल साउथ के देश भी शामिल हैं, के वरिष्ठ पेशेवरों और नेताओं की भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि IN-STEP उस साझा प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाता है, जो भारत की जी20 अध्यक्षता के दौरान सार्थक संवाद, आपसी सीख और रणनीतिक जुड़ाव के लिए एक स्थायी मंच विकसित करने को लेकर व्यक्त की गई थी। उन्होंने कहा कि दुनिया की बढ़ती परस्पर निर्भरता के कारण देशों के लिए उभरती चुनौतियों का अकेले सामना करना कठिन होता जा रहा है।

उन्होंने कहा कि वैश्विक रणनीतिक वातावरण तेजी से बदल रहा है। पारंपरिक सुरक्षा चिंताओं के साथ अब तकनीक, साइबरस्पेस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक मजबूती, समुद्री सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और आपूर्ति श्रृंखलाओं से जुड़ी चुनौतियां भी सामने हैं।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि IN-STEP व्यापक रणनीतिक दृष्टिकोण विकसित करने, वैश्विक घटनाक्रमों के दीर्घकालिक प्रभावों का आकलन करने और उचित प्रतिक्रियाएं तैयार करने का अवसर प्रदान करता है।

उन्होंने कहा, “वैश्विक स्तर पर सोचें, रणनीतिक रूप से जुड़ें और एकजुट होकर काम करें।” उन्होंने इन तीन सिद्धांतों को पहल की मूल भावना बताया और कहा कि साझा चुनौतियों का समाधान सहयोग, समन्वय और सामूहिक प्रयासों के माध्यम से अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकता है।

ग्लोबल साउथ के अनुभव महत्वपूर्ण

उपराष्ट्रपति ने अंतरराष्ट्रीय संवाद को आकार देने में विकासशील देशों की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इन देशों के विविध अनुभव और विकास संबंधी प्राथमिकताएं मजबूती, विकास, सुरक्षा, शासन और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के संदर्भ में महत्वपूर्ण सीख प्रदान करती हैं।

उन्होंने कहा कि ग्लोबल साउथ के देशों के साथ भारत का जुड़ाव आपसी सम्मान, साझा हितों, संप्रभु समानता तथा प्रत्येक देश की विकासात्मक और रणनीतिक प्राथमिकताओं की समझ पर आधारित है।

भ्रष्टाचार के खिलाफ सामूहिक प्रयास का आह्वान

सी. पी. राधाकृष्णन ने भ्रष्टाचार को विकासशील देशों के सामने मौजूद प्रमुख चुनौतियों में से एक बताते हुए इसके उन्मूलन के लिए सामूहिक प्रयासों का आह्वान किया। उन्होंने प्रतिभागियों से हर स्तर पर भ्रष्टाचार-मुक्त व्यवस्था बनाने की दिशा में काम करने और सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी एवं पारदर्शिता को प्राथमिकता देने का आग्रह किया।

कोविड-19 महामारी के दौरान भारत की ‘वैक्सीन मैत्री’ पहल के माध्यम से विकासशील देशों को दी गई सहायता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि तकनीकी प्रगति और वैज्ञानिक उपलब्धियों का लाभ पूरी मानवता तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने ज्ञान एवं नवाचार को मानव कल्याण के लिए साझा करने की आवश्यकता पर जोर दिया और इसे भारत की ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना से जोड़ा।

रणनीतिक समझ और पेशेवर संबंध मजबूत होंगे

उपराष्ट्रपति ने प्रतिभागियों के इस समूह को एक मंच पर लाने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय, विदेश मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय की सराहना की। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि कार्यक्रम के दौरान होने वाले संवाद से भाग लेने वाले देशों के बीच पेशेवर संबंध मजबूत होंगे और रणनीतिक समझ को बढ़ावा मिलेगा।

22 देशों के प्रतिनिधि ले रहे भाग

IN-STEP के चौथे संस्करण में कुल 38 प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं, जिनमें 22 देशों के 25 अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि हैं। इनमें श्रीलंका, सेशेल्स, मंगोलिया, नेपाल, मॉरिशस, मालदीव, ओमान, गुयाना, चिली, अर्जेंटीना, फिलीपींस, थाईलैंड, आर्मेनिया, किर्गिस्तान, कतर, म्यांमार, उज्बेकिस्तान और ब्राजील सहित अन्य देश शामिल हैं।

IN-STEP दो सप्ताह का कार्यक्रम है, जिसे विदेश मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय ने नेशनल डिफेंस कॉलेज के सहयोग से आयोजित किया है। यह कार्यक्रम वरिष्ठ पेशेवरों को रणनीतिक, सुरक्षा और विकास से जुड़े मुद्दों पर विचारों के आदान-प्रदान तथा संस्थागत एवं पेशेवर संबंधों को मजबूत करने का मंच प्रदान करता है।

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