तकनीक जवाबदेही को मजबूत करे : उप-राष्ट्रपति

👁 0 Views

उप-राष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने आज उप-राष्ट्रपति भवन में इंडियन डिफेंस एस्टेट्स सर्विस के 2025 बैच के प्रोबेशनर्स से संवाद किया। उन्होंने युवा अधिकारियों से देश सेवा के इस अवसर का पूरी लगन, ईमानदारी और सार्वजनिक जिम्मेदारी की मजबूत भावना के साथ सदुपयोग करने का आह्वान किया।

उप-राष्ट्रपति ने कहा कि प्रोबेशनर्स में से कई छोटे शहरों से आए हैं, जो दर्शाता है कि लगन और कड़ी मेहनत से कथित बाधाओं को पार किया जा सकता है। उन्होंने अधिकारियों से अपनी उपलब्धि पर गर्व करने के साथ-साथ लोक सेवक के रूप में मिली जिम्मेदारियों के प्रति सजग रहने को कहा।

उन्होंने देशभर में लगभग 18 लाख एकड़ रक्षा भूमि के प्रबंधन में डिफेंस एस्टेट्स ऑर्गनाइजेशन की महत्वपूर्ण भूमिका का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इसमें राष्ट्रीय संपत्तियों की सुरक्षा, नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराना, रक्षा बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाना और सशस्त्र बलों की ऑपरेशनल तैयारियों में सहयोग करना शामिल है।

श्री राधाकृष्णन ने डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में संगठन की पहलों, विशेषकर ‘ई-छावनी’ पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि एआई, जीआईएस, ड्रोन सर्वे, सैटेलाइट इमेजिंग, ऑटोमेटेड चेंज डिटेक्शन और 3-डी विजुअलाइजेशन जैसी तकनीकें रक्षा भूमि प्रबंधन की सटीकता, पारदर्शिता और कार्यक्षमता को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

तकनीक के साथ मानवीय जिम्मेदारी के महत्व पर जोर देते हुए उप-राष्ट्रपति ने कहा, “तकनीक को जवाबदेही को मजबूत करना चाहिए, न कि उसकी जगह लेनी चाहिए।” उन्होंने प्रोबेशनर्स से अपने कर्तव्यों के निर्वहन में दृढ़ रहने का आग्रह करते हुए कहा कि तकनीक भले ही विफल हो जाए, लेकिन अधिकारी की जिम्मेदारी की भावना और दृढ़ता कम नहीं होनी चाहिए।

तेजी से बदलते तकनीकी और वैज्ञानिक परिवेश का उल्लेख करते हुए उन्होंने युवा अधिकारियों से अपने ज्ञान और कौशल को लगातार विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने निरंतर क्षमता निर्माण के लिए आईजीओटी कर्मयोगी को महत्वपूर्ण मंच बताते हुए प्रोबेशनर्स को नए विचारों और नवाचार के प्रति खुले दृष्टिकोण के साथ कार्य करने के लिए प्रोत्साहित किया।

मशहूर तमिल कवि एवं दार्शनिक तिरुवल्लुवर का उल्लेख करते हुए श्री राधाकृष्णन ने कहा कि शिक्षा का वास्तविक महत्व तभी है, जब वह हमारे व्यवहार में दिखाई दे। उन्होंने कहा कि कानूनों, प्रक्रियाओं और शासन व्यवस्था की जानकारी के साथ चरित्र, दयालुता, ईमानदारी और नैतिक आचरण भी आवश्यक हैं।

उन्होंने युवा अधिकारियों को वरिष्ठों के मार्गदर्शन का सम्मान करने के साथ अनुचित दबाव से मुक्त होकर स्वतंत्र एवं निष्पक्ष तरीके से कार्य करने तथा फाइलों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने की सलाह दी।

उप-राष्ट्रपति ने कहा कि ‘विकसित भारत @2047’ के विजन को साकार करने में सिविल सेवकों की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसमें समावेशी विकास सुनिश्चित करने और शासन की पहुंच अंतिम छोर तक पहुंचाने पर विशेष ध्यान देना होगा। उन्होंने प्रोबेशनर्स से कहा कि उन्हें जो भी जिम्मेदारी सौंपी जाए, उसका पूरी लगन से निर्वहन करें, क्योंकि लोगों की सच्ची सेवा ही जनसेवा का सबसे बड़ा पैमाना

इस मौके पर रक्षा सचिव श्री राजेश कुमार सिंह, रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी और इंडियन डिफेंस एस्टेट्स सर्विस के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

👁 0 people read this article

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *