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देहली गेट पर जर्जर इमारत बनी हादसे का इंतजार? नगर निगम की जिम्मेदारी पर उठे सवाल,उदयपुर

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उदयपुर। शहर के व्यस्ततम क्षेत्रों में शामिल देहली गेट चौराहे पर स्थित एक पुरानी और जर्जर इमारत लोगों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। इमारत की हालत देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि इसकी दीवारें, छज्जे और बाहरी हिस्से काफी कमजोर हो चुके हैं। इसके बावजूद नीचे दुकानें संचालित हो रही हैं और आसपास दिनभर भारी संख्या में लोगों और वाहनों की आवाजाही रहती है।
फोटो में साफ दिखाई देता है कि भवन के ऊपरी हिस्से पर बड़े-बड़े होर्डिंग लगे हुए हैं। यदि तेज बारिश, आंधी या किसी अन्य कारण से भवन का कोई हिस्सा या होर्डिंग गिरता है, तो नीचे मौजूद दुकानदारों, राहगीरों और वाहन चालकों की जान को गंभीर खतरा हो सकता है। ऐसे में यह स्थान किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मार्ग से प्रतिदिन हजारों लोग गुजरते हैं। यदि समय रहते भवन की तकनीकी जांच नहीं कराई गई, तो भविष्य में जनहानि और आर्थिक नुकसान की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। लोगों का सवाल है कि क्या प्रशासन किसी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है?
सबसे बड़ा सवाल नगर निगम और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर उठ रहा है। यदि भवन जर्जर है तो क्या उसकी सुरक्षा जांच की गई? क्या भवन मालिक को कोई नोटिस जारी किया गया? क्या भवन को असुरक्षित घोषित करने या आवश्यक मरम्मत कराने की प्रक्रिया शुरू हुई है? इन सवालों के जवाब आमजन जानना चाहते हैं।
इतना ही नहीं, भवन पर लगे भारी-भरकम विज्ञापन बोर्ड भी चिंता बढ़ा रहे हैं। यदि भवन पहले से कमजोर है, तो उस पर अतिरिक्त भार डालने की अनुमति किन परिस्थितियों में दी गई? क्या इसके लिए सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था? यह भी जांच का विषय है।
शहर में पूर्व में भी जर्जर भवनों के कारण हादसे सामने आ चुके हैं। ऐसे मामलों के बाद प्रशासन अक्सर कार्रवाई की बात करता है, लेकिन यदि संभावित खतरे वाले भवनों की समय रहते पहचान और निगरानी नहीं होगी, तो दुर्घटनाओं को रोकना मुश्किल होगा।
रेड फेक्ट न्यूज़ किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच रहा है कि यह भवन तत्काल गिरने की स्थिति में है। हालांकि, तस्वीरों के आधार पर इसकी स्थिति चिंताजनक प्रतीत होती है। इसलिए संबंधित विभाग द्वारा विशेषज्ञों से भवन का संरचनात्मक निरीक्षण कराकर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करना आवश्यक है।
जनहित में सवाल:
क्या नगर निगम इस भवन की तत्काल तकनीकी जांच कराएगा?
क्या यहां आने-जाने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे?
यदि भवन असुरक्षित पाया जाता है, तो कार्रवाई कब होगी?
क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही जिम्मेदार विभाग सक्रिय होंगे?

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