सचिव श्री वी. श्रीनिवास ने प्रदेश के सभी चिकित्सा संस्थानों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता एवं आवश्यकता का आकलन कर जरूरत के अनुसार भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि अस्पतालों में मरीजों की संख्या और उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं के आधार पर डॉक्टरों की आवश्यकता की मैपिंग की जाए, ताकि जरूरत के अनुरूप पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध कराया जा सके।
श्री वी. श्रीनिवास सोमवार को स्वास्थ्य भवन में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित समीक्षा बैठक में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं, उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की पहचान एवं फॉलोअप, प्रसव सखी कार्यक्रम तथा नवजात शिशु देखभाल सेवाओं की समीक्षा कर रहे थे।
उन्होंने 6 सितंबर से 17 सितंबर तक प्रदेश में हुई मातृ मृत्यु की अस्पतालवार समीक्षा की। उन्होंने संबंधित अस्पताल प्रभारियों एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों से प्रत्येक मामले की जानकारी लेते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने कहा कि उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की समय पर पहचान, नियमित फॉलोअप और प्रसव पूर्व जांच सेवाओं की लगातार निगरानी की जा रही है। उन्होंने बताया कि अगस्त की तुलना में सितंबर माह में मातृ मृत्यु के मामलों में कमी आई है। अगस्त में 73 मातृ मृत्यु के मामले सामने आए थे, जबकि सितंबर में यह संख्या घटकर 35 रही है।
मुख्य सचिव ने उदयपुर जिले में हुई मातृ मृत्यु को गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य विभाग के निदेशालय स्तर से टीम भेजकर वहां की व्यवस्थाओं एवं मामलों की विस्तृत समीक्षा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की पहचान के साथ ही उन्हें गुणवत्तापूर्ण प्रसव पूर्व जांच और समय पर उपचार की सुविधा मिलना सुनिश्चित किया जाए।
मॉड्यूलर ओटी की जरूरत के अनुसार क्षमता बढ़ाने के निर्देश
मुख्य सचिव ने मेडिकल कॉलेजों में मॉड्यूलर ओटी के अपग्रेडेशन पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक अस्पताल में होने वाले ऑपरेशन के भार के अनुसार मॉड्यूलर ओटी की आवश्यकता तय की जाए। जहां अतिरिक्त मॉड्यूलर ओटी की जरूरत हो, वहां इनकी संख्या बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू की जाए। आवश्यकता होने पर बजट के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को प्रस्ताव भेजने के निर्देश भी दिए।
प्रसव सखी कार्यक्रम की नियमित निगरानी पर जोर
मुख्य सचिव ने कहा कि प्रसूताओं की सुविधा के लिए शुरू किया गया प्रसव सखी कार्यक्रम महत्वपूर्ण पहल है। इसे अस्पतालों में और बेहतर तरीके से लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रसूता के अस्पताल पहुंचने से लेकर प्रसव और प्रसव के बाद तक उसे जरूरी सहायता एवं सुविधाएं आसानी से मिलें, इसके लिए संबंधित स्टाफ के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है।
उन्होंने प्रसव सखी कार्यक्रम के तहत अस्पतालों में किए जा रहे समन्वय एवं उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की नियमित निगरानी करने के निर्देश दिए।
नवजात शिशु देखभाल इकाइयों की नियमित समीक्षा के निर्देश
मुख्य सचिव ने मेडिकल कॉलेजों में संचालित नियोनेटल आईसीयू तथा जिला अस्पतालों एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में संचालित एसएनसीयू एवं एनआईसीयू की नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन इकाइयों में आवश्यक उपकरण, दवाइयां एवं प्रशिक्षित स्टाफ उपलब्ध रहे।
उन्होंने गंभीर स्थिति वाले नवजात शिशुओं को समय पर बेहतर उपचार उपलब्ध कराने तथा आवश्यकता होने पर उन्हें उच्च चिकित्सा संस्थान में रेफर करने की व्यवस्था को प्रभावी बनाने के निर्देश दिए।
उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की देखभाल में गैप नहीं रहे
प्रमुख शासन सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, श्रीमती गायत्री राठौड़ ने कहा कि प्रदेश के सभी जिलों में संबद्ध मेडिकल कॉलेजों के विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा अन्य चिकित्सा संस्थानों के डॉक्टरों की मेंटरिंग नियमित रूप से जारी रखी जाए।
उन्होंने कहा कि उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं को चारों प्रसव पूर्व जांच समय पर उपलब्ध हों। इसके बाद प्रसव के दौरान और प्रसव के बाद भी उन्हें आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि गर्भवती महिलाओं की देखभाल में किसी भी स्तर पर गैप नहीं रहना चाहिए।
श्रीमती राठौड़ ने रेफरल सेवाओं को मजबूत करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि जरूरतमंद गर्भवती महिलाओं एवं नवजात शिशुओं को समय पर उच्च चिकित्सा संस्थान तक पहुंचाने के लिए रेफरल व्यवस्था की लगातार निगरानी की जाए।
बैठक में मिशन निदेशक, एनएचएम, डॉ. जोगाराम, प्रबंध निदेशक, आरएमएससीएल, श्री पुखराज सैन, आयुक्त, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण, श्री अविचल चतुर्वेदी, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, राजस्थान हेल्थ एश्योरेंस एजेंसी, श्री हरजीलाल अटल, चिकित्सा शिक्षा आयुक्त श्री बाबूलाल गोयल, निदेशक जनस्वास्थ्य डॉ. रवि प्रकाश शर्मा, निदेशक आरसीएच डॉ. मधु रतेश्वर सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।
