विशेष ग्राम सभाओं से गांवों तक पहुंचेगा वाटरशेड विकास

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राजस्थान सरकार, केंद्र सरकार के साथ मिलकर विशेष ग्राम सभाओं के माध्यम से नागरिक-केंद्रित वाटरशेड विकास सुधारों को ग्रामीण समुदायों तक पहुंचाने का प्रयास कर रही है। इस पहल का उद्देश्य जागरूकता, जनभागीदारी और सामुदायिक स्वामित्व को बढ़ावा देना है।

इस पहल को जन योजना अभियान (PPC) ‘सबकी योजना, सबका विकास’ के साथ एकीकृत किया जा रहा है। इसकी शुरुआत 2 अक्टूबर, 2026 से ग्राम सभाओं के माध्यम से होगी। राज्य में इसके तहत PMKSY-2.0 की वाटरशेड विकास परियोजनाओं के अंतर्गत लगभग 811 ग्राम पंचायतों में वाटरशेड विकास से संबंधित सुधारों एवं योजनाओं की जानकारी का प्रसार किया जाएगा। इसके बाद राज्य, जिला तथा 159 परियोजना-स्तरीय स्थानों पर विशेष ग्राम सभा की गतिविधियां आयोजित किए जाने का प्रस्ताव है।

मिट्टी और पानी का संरक्षण, समृद्ध किसान की आधारशिला

मिट्टी को बचाना है तो पानी को सहेजना जरूरी है। वाटरशेड विकास का उद्देश्य मिट्टी और जल का संरक्षण कर जल-सुरक्षित गांव, मजबूत कृषि व्यवस्था और समृद्ध किसान तैयार करना है। सूखा प्रभावित एवं वर्षा आधारित क्षेत्रों में, जहां पहले किसान एक भी फसल नहीं ले पाते थे, वहां अब एक फसल लेना संभव हो रहा है। वहीं, जिन क्षेत्रों में पहले एक फसल होती थी, वहां अब दो या उससे अधिक फसलें ली जा रही हैं। इससे कृषि उत्पादन, किसानों की आय और आजीविका के अवसरों में वृद्धि हो रही है।

देश में पिछले 12 वर्षों के दौरान लगभग 3.4 करोड़ हेक्टेयर क्षेत्र को वाटरशेड विकास कार्यक्रमों के अंतर्गत कवर किया गया है। पूर्ण हो चुकी परियोजनाओं वाले क्षेत्रों में भूजल स्तर में 3 मीटर तक वृद्धि, खेती के क्षेत्रफल में 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी और दूध उत्पादन में 40 प्रतिशत तक वृद्धि जैसे परिणाम सामने आए हैं। इन क्षेत्रों में किसानों की वार्षिक आय में 70 प्रतिशत तक की वृद्धि भी दर्ज की गई है।

राजस्थान में भी हुए महत्वपूर्ण परिणाम

राज्य में वाटरशेड विकास कार्यक्रमों के तहत अब तक 1,77,813 जल संरक्षण संरचनाएं तैयार की गई हैं। इसके अलावा 1,14,279.23 हेक्टेयर क्षेत्र को सुरक्षात्मक सिंचाई के तहत लाया गया है तथा 5,28,528 किसान लाभान्वित हुए हैं। 12,292.73 हेक्टेयर क्षेत्र में पौधारोपण एवं बागवानी गतिविधियां की गई हैं, जबकि 54,33,851 मानव दिवस का सृजन हुआ है।

वाटरशेड विकास का व्यापक उद्देश्य इसे केवल सरकारी कार्यक्रम तक सीमित न रखते हुए ‘जन आंदोलन’ में परिवर्तित करना है, जिसमें ग्रामीण समुदाय मिट्टी और जल के संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाएं। पिछले 12 वर्षों के दौरान वाटरशेड विकास कार्यक्रम में कई महत्वपूर्ण सुधार किए गए हैं।

बेहतर प्रावधान, बेहतर परिणाम

वाटरशेड विकास परियोजना के तहत अब प्रति हेक्टेयर पहले की तुलना में अधिक राशि उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि मिट्टी, जलस्रोतों और खेतों का बेहतर विकास किया जा सके।

  • मैदानी क्षेत्रों में राशि 12,000 रुपये से बढ़ाकर 22,000 रुपये प्रति हेक्टेयर की गई है।
  • पहाड़ी एवं कठिन क्षेत्रों में राशि 15,000 रुपये से बढ़ाकर 28,000 रुपये प्रति हेक्टेयर की गई है।

इससे गांवों में मिट्टी एवं जल संरक्षण से जुड़े अधिक कार्य बेहतर तरीके से किए जा रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप किसान दूसरी और तीसरी फसल लेने में सक्षम हो रहे हैं तथा उनकी आय में भी वृद्धि हो रही है।

जल्द काम, जल्द परिणाम

वाटरशेड विकास परियोजनाओं को अब कम समय में पूरा करने का प्रावधान किया गया है। परियोजना की अवधि 7 वर्ष से घटाकर 5 वर्ष कर दी गई है। इसका सीधा लाभ किसानों को मिल रहा है।

  • मिट्टी एवं जल संरक्षण के कार्य शीघ्र पूरे हो रहे हैं।
  • खेती के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ रही है।
  • मिट्टी का कटाव कम हुआ है और भूमि की उत्पादकता बढ़ी है।
  • किसानों एवं ग्रामीण परिवारों की आय में वृद्धि हुई है तथा उनके जीवन में समृद्धि और खुशहाली आई है।

उन्नत कृषि उपकरण और गुणवत्तापूर्ण बीज से बढ़ेगी किसानों की आय

जल की बेहतर उपलब्धता, मृदा नमी में वृद्धि तथा क्षरित भूमि के पुनरुद्धार से कृषि उत्पादकता में सुधार की मजबूत आधारशिला तैयार होती है। इन लाभों को खेत स्तर तक पहुंचाने के लिए वाटरशेड परियोजना क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण बीज, उन्नत कृषि उपकरण, फसल विविधीकरण, बागवानी, कृषि वानिकी तथा स्थानीय कृषि-जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप अन्य उत्पादन गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

वाटरशेड विकास को जन आंदोलन बनाने पर जोर

समुदाय की व्यापक भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए विभाग द्वारा देशव्यापी ‘वाटरशेड यात्रा’ और ‘वाटरशेड महोत्सव’ का आयोजन किया गया। इन पहलों के माध्यम से जनभागीदारी के जरिए वाटरशेड विकास को जन आंदोलन का स्वरूप देने का प्रयास किया गया है। इससे जल संरक्षण संरचनाओं के निर्माण के साथ-साथ उनके दीर्घकालिक रखरखाव में भी समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित हुई है।

विशेष ग्राम सभा को ‘फाइल से लाइफ’ तक ले जाने का प्रयास

राज्य के जलग्रहण विकास एवं भू-संरक्षण विभाग ने जिला एवं परियोजना स्तर पर योजना को क्रियान्वित कर रही फील्ड स्तर की मशीनरी को सक्रिय करने तथा विशेष ग्राम सभाओं में अधिकतम जनभागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया है।

विकसित भारत @2047 के लक्ष्य के अनुरूप सूखा-मुक्त भारत की दिशा में वाटरशेड विकास सुधारों को हर गांव तक पहुंचाया जा रहा है। इसके माध्यम से प्रत्येक समुदाय को जोड़ा जा रहा है और ग्रामीणों तक इन योजनाओं के वास्तविक लाभ पहुंचाना सुनिश्चित किया जा रहा है।

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