प्रदेश में कृषि क्षेत्र को आधुनिक तकनीक, नवाचार और डेटा आधारित निर्णय प्रणाली से जोड़ने की दिशा में कृषि विभाग द्वारा महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। इसी क्रम में कृषि अधिकारियों के लिए शुक्रवार को पंत कृषि भवन में एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें Wadhwani Institute for Artificial Intelligence (Wadhwani AI) के विशेषज्ञों ने कृषि क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के उपयोग, संभावनाओं और व्यावहारिक अनुप्रयोगों की जानकारी दी।
प्रशिक्षण का उद्देश्य कृषि अधिकारियों को AI की आधुनिक तकनीकों से परिचित कराने के साथ-साथ कृषि प्रशासन, योजना निर्माण, निगरानी, निर्णय प्रक्रिया और किसान सेवाओं में इसके प्रभावी उपयोग की संभावनाओं को समझना है। विभाग का लक्ष्य AI को केवल तकनीकी प्रयोग तक सीमित न रखते हुए कृषि व्यवस्था और किसान सेवा वितरण का अभिन्न हिस्सा बनाना है।
किसानों तक पहुंचेगा AI का लाभ
कृषि आयुक्त श्री नरेश कुमार गोयल ने कहा कि कृषि क्षेत्र में AI की उपयोगिता केवल विभागीय कार्यों तक सीमित नहीं है। किसानों तक इस तकनीक का प्रभावी हस्तांतरण आने वाले समय में कृषि को अधिक स्मार्ट, लाभकारी, टिकाऊ और जोखिम-रोधी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
उन्होंने कहा कि बुवाई से लेकर कटाई और उपज के विपणन तक कृषि की पूरी वैल्यू चेन में AI आधारित तकनीकों का उपयोग किसानों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है। मौसम आधारित कृषि सलाह, फसल की स्थिति का आकलन, कीट एवं रोगों की पहचान, उत्पादन पूर्वानुमान, सिंचाई एवं संसाधनों का बेहतर प्रबंधन तथा बाजार संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने में AI की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है।
मौसम और फसल संबंधी निर्णय होंगे अधिक सटीक
AI एवं Data Analytics के माध्यम से कृषि, मौसम और फसल से संबंधित बड़ी मात्रा में उपलब्ध आंकड़ों का विश्लेषण कर किसानों को अधिक सटीक, स्थानीय और समयबद्ध सलाह उपलब्ध कराने की संभावनाएं विकसित की जा रही हैं।
मौसम पूर्वानुमान और खेत में फसल की वास्तविक स्थिति के आधार पर किसानों को बुवाई, सिंचाई, उर्वरक प्रबंधन, कीट नियंत्रण और कटाई जैसे महत्वपूर्ण कृषि कार्यों के संबंध में समय पर निर्णय लेने में सहायता मिल सकेगी। इससे उत्पादन लागत को नियंत्रित करने, जोखिम कम करने और फसल उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
इसी प्रकार, AI आधारित प्रणालियों के माध्यम से फसल की नियमित निगरानी, कीट एवं रोगों की शुरुआती पहचान तथा संभावित उत्पादन का आकलन अधिक प्रभावी और वैज्ञानिक बनाया जा सकता है।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में बढ़ेगी पारदर्शिता
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के क्रियान्वयन में भी AI और आधुनिक डेटा आधारित तकनीकों की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। फसल की स्थिति और प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान के आकलन में रिमोट सेंसिंग, इमेज एनालिटिक्स, ड्रोन और अन्य आधुनिक तकनीकों के उपयोग से फसल क्षति मूल्यांकन को अधिक वैज्ञानिक, पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जा सकता है।
इससे फसल नुकसान के आकलन, दावों के निस्तारण और योजना की निगरानी में दक्षता बढ़ाने तथा किसानों को बीमा योजना का लाभ अधिक प्रभावी ढंग से उपलब्ध कराने में सहायता मिल सकती है।
AI आधारित कृषि प्रशासन का तैयार होगा संस्थागत ढांचा
राजस्थान कृषि विभाग AI को केवल प्रशिक्षण अथवा प्रायोगिक गतिविधियों तक सीमित न रखते हुए कृषि प्रशासन और किसान सेवा वितरण की व्यापक व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में कार्य कर रहा है।
AI आधारित नवाचारों, परियोजनाओं और तकनीकी समाधानों के विकास, परीक्षण, उपयोग और विस्तार के लिए मजबूत Institutional Framework तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है। इसके माध्यम से कृषि विभाग, तकनीकी संस्थानों, विशेषज्ञों, शोध संगठनों और निजी क्षेत्र के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सकेगा।
यह संस्थागत व्यवस्था कृषि क्षेत्र की स्थानीय चुनौतियों के अनुरूप उपयोगी और व्यवहारिक तकनीकी समाधान विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
AI आधारित कृषि नवाचारों को मिलेगा प्रोत्साहन
राजस्थान में Artificial Intelligence, Machine Learning और Data Analytics आधारित समाधानों को कृषि क्षेत्र में प्रोत्साहित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य किसानों की वास्तविक समस्याओं के समाधान के लिए नवाचारपूर्ण तकनीकी मॉडल विकसित करना और उन्हें खेत स्तर तक पहुंचाना है।
इसके अंतर्गत फसल एवं मौसम आधारित सलाह, कीट एवं रोगों की समयपूर्व पहचान, फसल उत्पादन एवं उपज का पूर्वानुमान, सिंचाई एवं कृषि संसाधनों का दक्ष उपयोग, फसल क्षति का त्वरित आकलन, कृषि योजनाओं की बेहतर निगरानी, बाजार एवं मूल्य संबंधी जानकारी तथा किसान शिकायतों और सेवाओं का समयबद्ध निस्तारण जैसे क्षेत्रों में विशेष संभावनाएं हैं।
Raj Kisan Portal होगा और अधिक स्मार्ट
किसानों को कृषि योजनाओं एवं सेवाओं से जोड़ने वाले Raj Kisan Portal को भी AI आधारित तकनीकों से और अधिक सक्षम बनाया जाएगा। AI एवं Data Analytics के माध्यम से किसान की आवश्यकता, फसल, क्षेत्र और प्रोफाइल के अनुरूप योजनाओं एवं सेवाओं की जानकारी उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।
इसके साथ ही आवेदन प्रक्रिया, सेवा वितरण, लंबित प्रकरणों और संभावित समस्याओं की पहचान में भी सहायता मिलेगी। इससे One-to-One Farmer Service Delivery की दिशा में आगे बढ़ते हुए किसानों को उनकी आवश्यकता के अनुसार लक्षित, त्वरित और पारदर्शी सेवाएं उपलब्ध कराना संभव हो सकेगा।
किसान होंगे तकनीकी परिवर्तन के केंद्र में
विभाग का उद्देश्य AI के उपयोग को केवल प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने तक सीमित रखना नहीं है, बल्कि किसान को इस Technology-driven Transformation के केंद्र में रखना है।
AI आधारित समाधानों के माध्यम से किसानों को फसल एवं मौसम संबंधी सलाह, कीट एवं रोगों की पहचान, कृषि समस्याओं के समाधान, योजनाओं की जानकारी और बाजार संबंधी आवश्यक सूचनाएं सरल, स्थानीय और समयबद्ध रूप में उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।
तकनीकी समाधान तभी प्रभावी होंगे, जब वे किसान की भाषा, स्थानीय परिस्थितियों और वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप हों। इसलिए AI आधारित सेवाओं के साथ किसानों और ग्रामीण स्तर के कार्मिकों में डिजिटल जागरूकता एवं तकनीकी क्षमता निर्माण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
Technology, Data और AI से बनेगा Future-Ready कृषि तंत्र
कृषि अधिकारियों का AI प्रशिक्षण, AI in Agriculture के लिए संस्थागत ढांचे का विकास तथा RAJAIIMS और Raj Kisan Portal जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म को AI एवं डेटा आधारित तकनीकों से जोड़ने के प्रयास राजस्थान की कृषि व्यवस्था को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
इन पहलों से Technology, Data, AI और Good Governance पर आधारित मजबूत कृषि इकोसिस्टम विकसित करने में मदद मिलेगी। इससे कृषि प्रशासन की दक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने तथा किसानों को अधिक स्मार्ट, त्वरित और जरूरत आधारित सेवाएं उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी।
विभाग का लक्ष्य आधुनिक तकनीक और नवाचारों का अधिकतम उपयोग करते हुए कृषि प्रशासन को पारदर्शी, जवाबदेह, कुशल और किसान-केंद्रित बनाना है। AI आधारित तकनीकों का लाभ खेत से लेकर बाजार तक किसानों तक पहुंचाकर प्रदेश की कृषि को अधिक उत्पादक, प्रतिस्पर्धी, टिकाऊ और भविष्य के लिए तैयार बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।
38 संगठनों के साथ MoU
उल्लेखनीय है कि राजस्थान में कृषि क्षेत्र को आधुनिक, टिकाऊ और भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप विकसित करने की दिशा में कृषि विभाग ने कुल 38 संगठनों के साथ समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इनमें TAFE-JFarm Services, Manipal University, Wadhwani AI, श्री रामशान्ताय जैविक कृषि एवं प्रशिक्षण केंद्र, National Institute of Agricultural Marketing (NIAM), 10 अग्रणी एग्रीटेक स्टार्टअप्स तथा 20 प्रतिष्ठित सिविल सोसाइटी संगठनों (CSOs) सहित अन्य संस्थाएं शामिल हैं।
इन साझेदारियों के माध्यम से प्राकृतिक खेती, जलवायु अनुकूल कृषि, कृषि नवाचार, आधुनिक तकनीकों के प्रसार तथा किसानों की आय में सतत वृद्धि की दिशा में कार्य किया जाएगा।
सभी संगठन एक साझा मंच के माध्यम से समन्वित रूप से कार्य करेंगे, जिससे प्रदेश के किसानों को जैविक एवं प्राकृतिक खेती से संबंधित तकनीकी सहयोग और आधुनिक जानकारी उपलब्ध हो सके। प्रत्येक तिमाही में सभी MoU साझेदारों के साथ कार्य प्रगति की समीक्षा और चर्चा की जाएगी। जिला स्तर पर सेमिनार आयोजित किए जाएंगे, जिनमें जिला प्रशासन की भी महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी।
किसानों को मिलेगा साझेदारियों का लाभ
इन समझौता ज्ञापनों से प्रदेश के किसानों को प्राकृतिक एवं जलवायु अनुकूल खेती की आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण मिल सकेगा। इससे खेती की लागत कम करने, उत्पादकता बढ़ाने तथा मृदा स्वास्थ्य और जल संरक्षण को बढ़ावा देने में सहायता मिलेगी।
जैविक एवं प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों को तकनीकी सहायता, प्रमाणन, मूल्य संवर्धन और बेहतर विपणन की सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में भी कार्य किया जाएगा। इससे किसानों के लिए आय के नए अवसर विकसित करने में मदद मिलेगी।
विशेष रूप से छोटे एवं सीमांत किसान, महिला किसान, युवा किसान तथा जनजातीय क्षेत्रों के कृषकों तक इन साझेदारियों का लाभ पहुंचाने पर जोर दिया जाएगा। प्रशिक्षण, प्रदर्शन प्लॉट, किसान समूहों का गठन, तकनीकी मार्गदर्शन और स्थानीय स्तर पर सतत सहयोग के माध्यम से कृषि को अधिक व्यवहारिक और परिणामोन्मुख बनाने का प्रयास किया जाएगा।
