जल जीवन मिशन से बदली कोटड़ी की तस्वीर

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एक समय था, जब प्रतापगढ़ जिले के अरनोद क्षेत्र का कोटड़ी गांव गर्मियों की दस्तक के साथ ही पेयजल संकट की चिंता से घिर जाता था। भूजल स्तर गिरने के साथ हैंडपंपों पर निर्भरता बढ़ जाती थी और कई बार गांव में टैंकरों के माध्यम से पानी पहुंचाना पड़ता था। सार्वजनिक नल और हैंडपंप ही ग्रामीणों की पेयजल जरूरतों के प्रमुख साधन थे।

आज तस्वीर बदल चुकी है

जल जीवन मिशन के तहत तैयार पाइप जल योजना ने कोटड़ी गांव और मजरा दूधिया के 570 परिवारों की पेयजल व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। अब ग्रामीणों को पानी के लिए टैंकरों का इंतजार नहीं करना पड़ता। पाइपलाइन के माध्यम से घर-घर पेयजल पहुंच रहा है और गांव की जलापूर्ति व्यवस्था पहले की तुलना में अधिक व्यवस्थित हुई है।

पहले—21 हैंडपंप, फिर भी पानी की चिंता

जल जीवन मिशन से पहले गांव में कुल 21 हैंडपंप स्थापित थे, लेकिन इनमें से केवल 7 ही चालू थे। 10 हैंडपंप मौसमी, 3 सूखे और 1 सिंगल फेज होने के कारण उपयोग में नहीं था। गर्मियों में भूजल स्तर गिरने से स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो जाती थी तथा ग्रामीणों को टैंकरों से जलापूर्ति पर निर्भर रहना पड़ता था।

इसके अलावा गांव के विद्यालयों, आंगनबाड़ी केंद्रों, स्वास्थ्य केंद्र और ग्राम पंचायत कार्यालय जैसे महत्वपूर्ण संस्थानों में भी नल कनेक्शन उपलब्ध नहीं थे।

अब—पाइपलाइन से घर-घर पहुंच रहा पेयजल

जल जीवन मिशन के अंतर्गत कोटड़ी में 5 नलकूप, 350 किलोलीटर क्षमता का उच्च जलाशय और 100 किलोलीटर क्षमता का स्वच्छ जलाशय तैयार किया गया। जल वितरण के लिए गांव में 9,406 मीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई गई और 570 जल संबंध प्रदान किए गए।

इसके बाद गांव की पेयजल व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव आया। गर्मियों में पर्याप्त पेयजल उपलब्ध होने से टैंकरों के माध्यम से पानी पहुंचाने की आवश्यकता नहीं पड़ी।

घरों के साथ संस्थानों तक भी पहुंचा पानी

योजना का प्रभाव गांव के सार्वजनिक जीवन पर भी पड़ा है। वर्तमान में 6 विद्यालयों और 3 आंगनबाड़ी केंद्रों में नल कनेक्शन के माध्यम से जलापूर्ति हो रही है। पंचायत कार्यालय, राजीव गांधी सेवा केंद्र और स्वास्थ्य केंद्र भी नल जल व्यवस्था से जुड़ चुके हैं।

पर्याप्त पेयजल उपलब्ध होने से गांव में स्वच्छता व्यवस्था में भी सुधार आया है।

गांव बना अपनी जल व्यवस्था का भागीदार

कोटड़ी की सफलता केवल पाइपलाइन और जल संरचनाओं तक सीमित नहीं है। इसमें ग्रामीणों की भागीदारी भी महत्वपूर्ण रही है। ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति का गठन कर समुदाय को योजना के संचालन और संधारण से जोड़ा गया।

समिति के सदस्यों को फील्ड टेस्ट किट के माध्यम से जल गुणवत्ता की जांच का प्रशिक्षण दिया गया। स्थानीय ग्रामीणों को इलेक्ट्रीशियन, प्लंबर और फिटिंग जैसे ट्रेड में कौशल प्रशिक्षण भी दिया गया, ताकि योजना के संचालन एवं रखरखाव के लिए आवश्यक तकनीकी सहयोग गांव में ही उपलब्ध हो सके।

साझा जिम्मेदारी से बनी स्थायी व्यवस्था

योजना के संचालन एवं संधारण के लिए प्रति जल संबंध 100 रुपये का मासिक शुल्क निर्धारित किया गया है। अगस्त 2026 तक ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति द्वारा 22.20 लाख रुपये की राशि एकत्रित की गई, जबकि संचालन एवं संधारण पर 23.43 लाख रुपये खर्च किए गए।

नव निर्मित कॉलोनी के लिए 2,000 मीटर अतिरिक्त पाइपलाइन भी बिछाई गई है।

कोटड़ी की कहानी बदलाव की उस तस्वीर को सामने लाती है, जहां ‘पानी की तलाश’ धीरे-धीरे ‘पानी की नियमित उपलब्धता’ में बदल गई। जल जीवन मिशन ने यहां केवल पेयजल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार नहीं किया, बल्कि समुदाय को अपनी जल व्यवस्था का सहभागी बनाते हुए उसके संचालन और संधारण की जिम्मेदारी से भी जोड़ा।

कोटड़ी का संदेश स्पष्ट है—जब पानी घर तक पहुंचता है और गांव अपनी जल व्यवस्था में भागीदार बनता है, तो बदलाव सिर्फ नल में नहीं, बल्कि पूरे गांव के जीवन में दिखाई देता है।

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