ग्रामीण परिवारों की आय अक्सर खेती पर निर्भर होती है। ऐसे में कोई हुनर सीखना युवाओं के लिए रोजगार और बेहतर आजीविका के नए रास्ते खोल सकता है। इसी उद्देश्य से 25 सितंबर 2014 को ‘दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना’ (डीडीयू-जीकेवाई) शुरू की गई। यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों के वंचित और कमजोर परिवारों के 15 से 35 वर्ष के युवाओं को रोजगार से जुड़े कौशल प्रशिक्षण और प्लेसमेंट सहायता प्रदान करती है।
बदलती रोजगार जरूरतों के अनुरूप डीडीयू-जीकेवाई 2.0 में उद्योग आधारित प्रशिक्षण, दीर्घकालिक रोजगार, नौकरी के बाद सहायता तथा कौशल उन्नयन पर जोर दिया गया है। जून 2026 तक योजना के तहत 18.45 लाख ग्रामीण युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया, जबकि 12.35 लाख युवाओं को रोजगार मिला।
इस योजना ने कई युवाओं के जीवन में बदलाव की राह खोली है। नागालैंड की विमेथानो सखरी ने आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र में प्रशिक्षण लिया और बेंगलुरु में नौकरी हासिल की। बिहार के चंदन शाह ने सहायक इलेक्ट्रीशियन का प्रशिक्षण लेकर नौकरी शुरू की और बाद में दुबई में इलेक्ट्रीशियन के रूप में काम करने का अवसर पाया।
असम की रूपाली हासदा ने सिलाई मशीन ऑपरेटर का प्रशिक्षण लेकर तमिलनाडु में नौकरी की। बाद में अपनी बचत से सिलाई-कटाई केंद्र शुरू कर उन्होंने खुद के साथ एक अन्य युवा के लिए भी रोजगार का अवसर पैदा किया। वहीं, झारखंड के हीरालाल पंडित ने हेल्थकेयर क्षेत्र में प्रशिक्षण लेकर नासिक के एक अस्पताल में जनरल ड्यूटी असिस्टेंट के रूप में नौकरी हासिल की।
इन कहानियों से पता चलता है कि कौशल प्रशिक्षण केवल नौकरी पाने का माध्यम नहीं, बल्कि युवाओं को आत्मनिर्भर बनने और अधिक सुरक्षित भविष्य की ओर बढ़ने का अवसर भी दे सकता है। डीडीयू-जीकेवाई का उद्देश्य इसी पहले कदम को मजबूत बनाना है, ताकि ग्रामीण युवा प्रशिक्षण से रोजगार और रोजगार से टिकाऊ आजीविका की ओर आगे बढ़ सकें।
