15 सितंबर
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में उत्तरी भारत की वर्षों से लंबित जल परियोजनाएं अब धरातल पर क्रियान्वित होने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। इसी क्रम में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह की अध्यक्षता में मंगलवार को नई दिल्ली में आयोजित महत्वपूर्ण बैठक में किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना के लिए छह राज्यों के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। किशाऊ परियोजना से उपलब्ध होने वाला जल शेखावाटी के जल अभावग्रस्त क्षेत्रों की आवश्यकताओं की पूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी. आर. पाटिल की मौजूदगी में हुए इस एमओयू पर मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा सहित छह राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने हस्ताक्षर किए।
किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना यमुना की प्रमुख सहायक नदी टौंस पर उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर प्रस्तावित है। लगभग 15,000 करोड़ रुपये की इस परियोजना से 660 मेगावाट जलविद्युत का उत्पादन होगा। परियोजना से राजस्थान के साथ-साथ उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हरियाणा लाभान्वित होंगे।
परियोजना के तहत हिमाचल प्रदेश के जल हिस्से का एक भाग राजस्थान और दिल्ली को आवंटित किया जाएगा। इसके बदले इन राज्यों द्वारा हिमाचल प्रदेश के विद्युत घटक की लागत में योगदान किया जाएगा। जल घटक की 90 प्रतिशत लागत केंद्र सरकार द्वारा सहायता के रूप में वहन की जाएगी, जबकि शेष 10 प्रतिशत लागत भागीदार राज्यों द्वारा वहन की जाएगी।
किशाऊ बांध परियोजना को भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय परियोजना के रूप में शामिल किया गया है। परियोजना के निर्माण, संचालन एवं रख-रखाव की जिम्मेदारी किशाऊ कॉरपोरेशन लिमिटेड द्वारा निभाई जाएगी तथा इसकी निगरानी अपर यमुना बेसिन से संबंधित व्यवस्था के तहत की जाएगी।
शेखावाटी के लिए जल सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम
किशाऊ बांध से राजस्थान को आवंटित 124 एमसीएम पानी को यमुना जल परियोजना के तहत तीन भूमिगत पाइपलाइन प्रणालियों के माध्यम से हरियाणा के हांसीवासी से चूरू तक पहुंचाने की योजना है। इससे सीकर, चूरू, झुंझुनूं एवं आसपास के क्षेत्रों में पेयजल सहित अन्य आवश्यकताओं के लिए जल उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण मदद मिलेगी।
पर्याप्त एवं नियमित जल उपलब्धता से शेखावाटी के सामाजिक, शैक्षणिक, आर्थिक एवं स्वास्थ्य मानकों में सुधार की नई संभावनाएं विकसित होंगी। इससे क्षेत्र के विकास को गति मिलेगी और लोगों के जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव आएगा।
यमुना जल समझौते से किशाऊ तक, व्यापक जल दृष्टि
शेखावाटी क्षेत्र के लिए दीर्घकालीन जल सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में राज्य सरकार द्वारा निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। यमुना जल समझौते के तहत सीकर, चूरू, झुंझुनूं सहित अन्य क्षेत्रों की पेयजल आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए भूमिगत पाइपलाइन के माध्यम से राजस्थान में पानी लाने के लिए संयुक्त डीपीआर तैयार करने पर सहमति बनी है।
अब किशाऊ परियोजना के संशोधित एमओयू से इस समग्र जल व्यवस्था को और मजबूत आधार मिलेगा। परियोजना से उपलब्ध जल का उपयोग पेयजल, सिंचाई एवं अन्य जनहितकारी आवश्यकताओं के लिए किया जा सकेगा।
राजस्थान के हितों का विशेष ध्यान
संशोधित समझौते में राजस्थान के हितों को विशेष महत्व दिया गया है। हिमाचल प्रदेश द्वारा अपने विद्युत घटक से संबंधित लागत वहन किए जाने के बदले किशाऊ परियोजना में उसके आवंटित जल हिस्से का 95 प्रतिशत दिल्ली और राजस्थान को उपलब्ध होगा, जबकि 5 प्रतिशत हिस्सा हिमाचल प्रदेश अपने स्थानीय उपयोग के लिए रखेगा। इस 95 प्रतिशत हिस्से में दिल्ली और राजस्थान की हिस्सेदारी 75:25 के अनुपात में होगी।
शेखावाटी में विकास का नया अध्याय
मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के प्रयासों से शेखावाटी जल उपलब्धता के साथ-साथ कनेक्टिविटी, पर्यटन, विरासत संरक्षण एवं हवाई संपर्क के क्षेत्र में भी व्यापक बदलाव की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
क्षेत्र में यमुना जल समझौता, ऐतिहासिक हवेलियों एवं समृद्ध विरासत के संरक्षण के प्रयास, एक्सप्रेस-वे एवं हाईवे परियोजनाएं तथा सीकर और झुंझुनूं में हवाई संपर्क से जुड़ी योजनाएं शेखावाटी को विकास के नए केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
इन परियोजनाओं का समन्वित प्रभाव शेखावाटी की अर्थव्यवस्था को नई गति देगा। बेहतर जल उपलब्धता के साथ सड़क एवं हवाई कनेक्टिविटी, पर्यटन और विरासत संरक्षण से रोजगार एवं निवेश के अवसर बढ़ेंगे। इससे क्षेत्र के युवाओं को अपने ही क्षेत्र में बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की संभावनाएं मजबूत होंगी।
32 वर्षों से लंबित जल हिस्से की दिशा में निर्णायक पहल
मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में जल अभावग्रस्त राजस्थान में जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रामजल सेतु लिंक परियोजना सहित प्रदेश के प्रत्येक जिले में पेयजल एवं सिंचाई के लिए जल संसाधन उपलब्ध कराने की योजनाएं क्रियान्वित की जा रही हैं।
वर्ष 1994 में पांच राज्यों के बीच हुए यमुना जल समझौते के तहत ताजेवाला हेड से मानसून अवधि में राजस्थान के लिए 1,917 क्यूसेक (577 एमसीएम) जल आवंटित किया गया था। जल प्रवाह प्रणाली उपलब्ध नहीं होने के कारण राजस्थान पिछले 32 वर्षों से अपने हिस्से के इस पानी का लाभ नहीं ले पा रहा था। किशाऊ परियोजना सहित वर्तमान जल समझौतों और परियोजनाओं से प्रदेश की दीर्घकालीन जल सुरक्षा को मजबूत आधार मिलने की उम्मीद है।
